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ध्वस्तीकरण के बाद उजड़े आशियानों का कांग्रेस ने किया निरीक्षण, पुनर्वास को लेकर तेज हुई सियासत,कार्रवाई के बाद से इलाके में बढ़ी राजनीतिक हलचल, विपक्षी दलों का आना-जाना जारी

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वाराणसी। रोहनिया थाना क्षेत्र के अवलेशपुर चौरा माता के पीछे सरकारी भूमि पर हुई प्रशासनिक ध्वस्तीकरण कार्रवाई के बाद मंगलवार को कांग्रेस पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। कांग्रेस नेताओं ने उजड़े परिवारों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और मौके की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए और गरीब परिवारों के पुनर्वास की मांग प्रमुखता से रखी गई।

कांग्रेस जिला अध्यक्ष राजेश्वर सिंह पटेल के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वर्षों से बसे गरीब परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था उजाड़ना अन्यायपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी पीड़ितों के साथ खड़ी है और इस मुद्दे को लेकर जल्द ही प्रशासन से ठोस मांग रखी जाएगी।

निरीक्षण के दौरान कांग्रेस नेताओं ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए भरोसा दिलाया कि उनकी लड़ाई सड़कों से लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक मंच तक लड़ी जाएगी। जिला अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह गरीबों को उजाड़ा जा रहा है, वह निंदनीय है और यदि ग्रामीण एकजुट रहेंगे तो कांग्रेस भी पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ी रहेगी।

निरीक्षण के समय कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी मौजूद रहे, जिनमें पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल श्रीवास्तव, पूर्व जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा, प्रवक्ता राहुल राजभर, पिछड़ा मोर्चा से केशव प्रसाद वर्मा, महिला जिला अध्यक्ष अनुराधा यादव, विनोद सिंह ‘कल्लू’, रामसुंदर पटेल, अजय सिंह, घनश्याम सिंह सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और क्षेत्रवासी शामिल रहे।

उधर, ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद से इलाके में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों के नेता और कार्यकर्ता भी अलग-अलग समय पर मौके पर पहुंच रहे हैं और प्रभावित परिवारों से संपर्क कर रहे हैं। इससे मामला अब सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक मुद्दा बनता नजर आ रहा है।

वहीं, प्रभावित परिवारों में नाराजगी और असंतोष बना हुआ है। लोग प्रशासन से पुनर्वास की स्पष्ट और ठोस घोषणा की मांग कर रहे हैं। हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक पुनर्वास को लेकर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई सरकारी भूमि को अवैध कब्जे से मुक्त कराने के उद्देश्य से नियमानुसार की गई है।

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