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अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर काशी की सशक्त दस्तक,‘ब्रांड बनारस’ बना वैश्विक आकर्षण का केंद्र, 12 वर्षों में 45 करोड़ से अधिक पर्यटकों का कीर्तिमान

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वाराणसी।आदित्यनाथ के नेतृत्व में धर्म, अध्यात्म, संस्कृति और इतिहास की पावन त्रिवेणी से सजी पौराणिक नगरी काशी ने बीते एक दशक में अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। आज ‘ब्रांड बनारस’ विश्व भर के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन चुका है।

अपनी मौलिक पहचान को अक्षुण्ण रखते हुए आधुनिक कलेवर में ढलती काशी की बदली हुई छवि ने देश-विदेश के सैलानियों को अभूतपूर्व रूप से आकर्षित किया है। इसका सीधा असर न केवल पर्यटन उद्योग पर पड़ा है, बल्कि काशी की आर्थिकी और रोजगार के अवसरों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

12 वर्षों में 45.44 करोड़ से अधिक पर्यटक

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से 2025 (सितंबर तक) के बीच कुल 45,44,82,662 भारतीय एवं विदेशी पर्यटकों ने काशी का भ्रमण किया।

वर्ष 2014 में जहां पर्यटकों की संख्या 54,89,997 थी, वहीं 2025 (सितंबर तक) यह आंकड़ा बढ़कर 14,69,75,155 तक पहुँच गया। इस प्रकार 2014 की तुलना में 2025 में पर्यटकों की संख्या में 14.64 करोड़ से अधिक की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

इन 12 वर्षों में भारतीय पर्यटक – 45,16,09,026 तथा विदेशी पर्यटक – 28,73,636 रहे, जो काशी की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रमाण है।

डबल इंजन सरकार में धरातल पर उतरा विकास

दशकों तक कागजी योजनाओं तक सीमित रहे विकास कार्य अब धरातल पर साकार हो रहे हैं। वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी से सांसद बनने और 2017 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में डबल इंजन सरकार बनने के बाद काशी के सर्वांगीण विकास को नई दिशा मिली।

मजबूत कानून व्यवस्था, बेहतर सड़क-रेल-हवाई कनेक्टिविटी, आधुनिक बुनियादी ढांचा और विश्वस्तरीय सुविधाओं ने वाराणसी को देश के शीर्ष पर्यटन केंद्रों में स्थापित कर दिया है।

विश्वनाथ कॉरिडोर से सारनाथ तक बदली काशी की तस्वीर

नव्य-भव्य काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर के लोकार्पण से श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाओं का अभूतपूर्व विस्तार हुआ।

इसके साथ ही गंगा घाटों का सौंदर्यीकरण, स्वच्छता व्यवस्था में सुधार, बुद्ध की तपोस्थली सारनाथ का विकास, गंगा में क्रूज़ संचालन और आधुनिक पर्यटन सुविधाओं ने काशी की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है।

कोरोना के बाद रिकॉर्ड उछाल

कोरोना महामारी के कारण वर्ष 2020 और 2021 में पर्यटन प्रभावित हुआ, लेकिन इसके बाद काशी में पर्यटकों की संख्या में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला। वर्ष 2022 से 2025 तक हर साल रिकॉर्ड संख्या में सैलानी वाराणसी पहुंचे, जिससे पर्यटन उद्योग को नई रफ्तार मिली।

12 वर्षों में पर्यटकों की वर्षवार संख्या

2014 – 54,89,997

2015 – 57,16,297

2016 – 59,12,665

2017 – 62,82,215

2018 – 64,45,160

2019 – 67,97,775

2020 – 9,82,492

2021 – 30,78,479

2022 – 7,12,31,051

2023 – 8,54,73,633

2024 – 11,10,97,743

2025 (सितंबर तक) – 14,69,75,155

वर्जन

राहुल मेहता, अध्यक्ष, टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन, उप्र

“वाराणसी में पर्यटकों की बढ़ती संख्या से पर्यटन उद्योग से जुड़े हर वर्ग को लाभ मिला है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। काशी आज वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रही है।”

खालिद अंसारी, एमडी, कोरल होटल्स एंड रिसोर्ट:

“किसी शहर के विकास से पर्यटन उद्योग को गति मिलती है। वाराणसी जैसे ऐतिहासिक शहर में विकास के साथ पर्यटन, होटल और रियल एस्टेट सेक्टर में रोजगार की संभावनाएं कई गुना बढ़ गई हैं।”

“काशी में पर्यटन का स्वर्णिम दौर चल रहा है। सरकार द्वारा विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित किए जाने का परिणाम आज रिकॉर्ड पर्यटकों के रूप में दिख रहा है। गंगा आरती , घाटों की सुंदरता और रिवर क्रूज़ पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।”

 

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