वाराणसी, 2 अक्टूबर। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 157वीं और पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की 122वीं जयंती श्रद्धा एवं गरिमापूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर ‘महात्मा गांधी एवं अहिंसा’ विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि गांधी जी का जीवन सत्य और अहिंसा का अनुपम संदेश देता है। विद्यार्थियों को उनके आदर्शों को केवल स्मरण करने के बजाय जीवन में आत्मसात करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अहिंसा कमजोरी नहीं, बल्कि आत्मबल, संयम और नैतिक साहस की शक्ति है। उन्होंने लालबहादुर शास्त्री के सादगी, ईमानदारी और राष्ट्रसेवा से भरे जीवन को भी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायी बताया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर स्थित अति प्राचीन महात्मा गांधी की प्रतिमा पर कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित आचार्यों एवं अतिथियों ने माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

कार्यक्रम संयोजक एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के आचार्य तथा छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने कहा कि महापुरुषों के जीवन से नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। मुख्य वक्ता न्याय विभाग के सहायक आचार्य डॉ. दुर्गेश पाठक ने कहा कि गांधी और शास्त्री ने अपने आचरण से समाज के सामने अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किए।
अर्थशास्त्र विभाग के आचार्य एवं पुस्तकाध्यक्ष प्रो. राजनाथ ने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी विरासत, संस्कृति और महापुरुषों के जीवन-मूल्यों से परिचित कराने में महत्वपूर्ण हैं। वेदांत के वरिष्ठ आचार्य प्रो. सुधाकर मिश्र ने गांधी जी के जीवन-मूल्यों और अहिंसा की प्रासंगिकता पर विचार रखे।
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण से हुआ। मां सरस्वती एवं गांधी जी के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन किया गया। स्वागत एवं संचालन डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने किया तथा आभार डॉ. सत्येन्द्र कुमार ने व्यक्त किया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान हुआ।
इस अवसर पर प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. सुधाकर मिश्र, प्रो. राजनाथ, डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. दुर्गेश पाठक, डॉ. सत्येन्द्र कुमार सहित विश्वविद्यालय के आचार्य, अधिकारी, कर्मचारी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।










