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गुरु के सम्मान में रोपे पौधे, विद्यार्थियों ने लिया प्रकृति संरक्षण का संकल्प

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चकिया, चंदौली। शिक्षक दिवस के अवसर पर पंडित बच्चन जी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, उसरी-चकिया एवं चकिया रेंज, काशी वन्य जीव प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को महाविद्यालय परिसर में ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षक सम्मान के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। विद्यार्थियों ने पौधरोपण के माध्यम से गुरु और प्रकृति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने ‘छात्र जीवन में शिक्षा एवं शिक्षक की भूमिका’ तथा ‘प्राचीन और वर्तमान शिक्षा व्यवस्था’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यार्थियों ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, गुरुकुल व्यवस्था और आधुनिक शिक्षा पद्धति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए शिक्षक को व्यक्तित्व एवं राष्ट्र निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बताया।

मुख्य अतिथि चकिया रेंज के रेंजर ए.के. चौबे ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को शक्ति और मातृ स्वरूप माना गया है। मां को प्रथम गुरु का दर्जा दिया गया है। ऐसे में शिक्षक दिवस पर ‘एक पेड़ गुरु के नाम’ की पहल गुरु और प्रकृति दोनों के प्रति सम्मान की सार्थक अभिव्यक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों से पर्यावरण संरक्षण को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

डिप्टी रेंजर आनंद दुबे ने कहा कि प्राचीन गुरुकुल प्राकृतिक एवं वन्य परिवेश में संचालित होते थे। इससे स्पष्ट है कि भारतीय शिक्षा परंपरा का प्रकृति से गहरा संबंध रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ. अभिषेक कुमार पांडेय ने शिक्षक दिवस की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने अपना जीवन शिक्षा और विद्यार्थियों के बौद्धिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक विकास के लिए समर्पित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास ही शिक्षक के लिए सबसे बड़ा सम्मान है। शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के निर्माण का महत्वपूर्ण माध्यम है।

कार्यक्रम के दौरान बाबा साहब आप्टे की जयंती एवं समर्पण दिवस भी मनाया गया। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व एवं योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय इतिहास के प्रामाणिक अध्ययन और उसके पुनर्लेखन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन से अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना को प्रेरणा मिली।

वक्ताओं ने कहा कि बाबा साहब आप्टे विद्यार्थियों को भारत के गौरवशाली और प्रामाणिक इतिहास से परिचित कराने के पक्षधर थे, ताकि नई पीढ़ी अपनी संस्कृति और विरासत को समझते हुए राष्ट्र के प्रति जिम्मेदार एवं गौरवान्वित नागरिक बन सके।

इसके बाद महाविद्यालय परिसर में लेखन प्रतियोगिता आयोजित की गई, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से शिक्षक सम्मान, भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा, इतिहास-बोध और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषयों को एक साथ जोड़ते हुए विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया गया।

कार्यक्रम में रेंजर ए.के. चौबे, डिप्टी रेंजर आनंद दुबे, प्रबंधक डॉ. अभिषेक कुमार पांडेय, प्राचार्य डॉ. शैलेश दुबे सहित संदीप लाल, संदीप प्रजापति, अमित पांडेय, प्रीति उपाध्याय, संध्या मौर्या, सतीश कुमार तथा वन विभाग के वन दरोगा राम आशीष, लाल बहादुर यादव, जसवंत, मोहम्मद आजाद, शिवदत्त सिंह, आदित्य कुमार और महाविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

संचालन संदीप सर ने किया। अतिथियों का स्वागत प्रबंधक डॉ. अभिषेक कुमार पांडेय तथा धन्यवाद ज्ञापन प्राचार्य डॉ. शैलेश दुबे ने किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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