वाराणसी। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे सहस्र चंडी महायज्ञ के समापन से पूर्व शनिवार को जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के सानिध्य में मां ललिता त्रिपुर सुंदरी का विशेष पूजन-अनुष्ठान विधि-विधान से संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच आचार्यों ने पूजन, मंत्रजाप और हवन कराया तथा यज्ञकुंड में विशेष आहुतियां समर्पित की गईं।
अनुष्ठान में संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने मां ललिता त्रिपुर सुंदरी की आराधना कर राष्ट्र, समाज और समस्त मानवता के कल्याण की कामना की। वैदिक मंत्रों और देवी स्तुति से महासंस्थानम परिसर भक्तिमय बना रहा।
इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति की आराधना केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम नहीं, बल्कि लोककल्याण, धर्मरक्षा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का भी आधार है। मां ललिता त्रिपुर सुंदरी की उपासना साधक को शक्ति, ज्ञान और विवेक प्रदान करने की प्रेरणा देती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज और राष्ट्र के समक्ष अनेक चुनौतियां हैं। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से समाज में सद्भाव, संस्कार और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जाता है। अनुष्ठान के दौरान राष्ट्रविरोधी एवं विघटनकारी शक्तियों के उन्मूलन तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा की कामना से विशेष आहुतियां अर्पित की गईं।

सहस्र चंडी महायज्ञ के अंतर्गत महासंस्थानम में लगातार विभिन्न देवी-देवताओं के विशेष पूजन और धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए जा रहे हैं। महायज्ञ के समापन एवं पूर्णाहुति कार्यक्रम की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। शनिवार के विशेष पूजन में श्रम आयुक्त डॉ. महेश कुमार पाण्डेय, डॉ. विनय कुमार मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी, शिवानंद पाठक सहित संत, विद्वान एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने जगद्गुरु शंकराचार्य का आशीर्वाद प्राप्त कर राष्ट्र और समाज के कल्याण की कामना की।










