चकिया, चंदौली। भारी बारिश से चकिया विधानसभा के ग्रामीण इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त है। कई स्थानों पर जलभराव और बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। ऐसे मुश्किल समय में राहत और सुविधाएं बढ़ने के बजाय ग्रामीणों की परेशानी रात के अंधेरे में और गहरी होती दिखाई दे रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय करीब पांच घंटे तक बिजली कटौती की शिकायत सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि बिजली आने के बाद भी ग्रामीणों को राहत नहीं मिल रही। लोगों के मुताबिक कभी-कभी एक घंटे के अंतराल में दो-दो बार बिजली गुल हो रही है।
अब सवाल यह नहीं कि बिजली कब आएगी। सवाल यह है कि आखिर आपदा के समय जनता को अंधेरे में रखने की नौबत क्यों आई?

बाढ़ का पानी सिर पर, बिजली गायब—आखिर यह कैसी व्यवस्था?
भारी बारिश के बीच ग्रामीण पहले ही जलभराव, आवागमन और अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। ऐसे में रात में बिजली कटौती ने संकट को और गंभीर कर दिया है।
*अंधेरे में घरों से निकलना मुश्किल*
, बच्चों और बुजुर्गों की परेशानी अलग और बिजली से चलने वाले जरूरी उपकरण बंद। इसके बावजूद यदि घंटों आपूर्ति बाधित रहती है तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने जमीनी स्थिति की समीक्षा की है?
*एक घंटे में दो बार कटौती—यह फाल्ट है या व्यवस्था की विफलता?*
ग्रामीणों की सबसे बड़ी शिकायत बार-बार बिजली काटे जाने को लेकर है। बिजली कुछ देर आती है और फिर चली जाती है। कई बार एक घंटे के भीतर ही दो बार कटौती होने की बात कही जा रही है।
*यदि फाल्ट है तो स्थायी समाधान क्यों नहीं?*
यदि शटडाउन है तो जनता को सूचना क्यों नहीं?
यदि आपात स्थिति है तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं?
इन सवालों का जवाब बिजली विभाग को देना चाहिए।
विधायक और जिला अध्यक्ष के क्षेत्र में जनता की सुनवाई कौन करेगा?
चकिया विधानसभा के विधायक और जिले के पार्टी अध्यक्ष के क्षेत्र में जनता जब बिजली जैसी बुनियादी सुविधा के लिए परेशान हो, तो राजनीतिक नेतृत्व से सवाल उठना स्वाभाविक है।
*जनता का सवाल सीधा है—जब चुनाव आता है तो नेता जनता के बीच पहुंचते हैं, लेकिन जब जनता बाढ़ और बिजली संकट के बीच फंसती है तो उसकी आवाज कौन उठाएगा?*
क्या स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से रात की कटौती को लेकर जवाब मांगा है?
क्या ग्रामीण क्षेत्रों की विद्युत व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए कोई निरीक्षण कराया गया?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों को तत्काल निर्बाध आपूर्ति के निर्देश दिए गए?
जनता इन सवालों का जवाब चाहती है।
*“नेता चुनने पर अफसोस”*
—ग्रामीणों में बढ़ता आक्रोश
लगातार बिजली कटौती से परेशान ग्रामीणों के बीच नाराजगी बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि उन्होंने जनप्रतिनिधियों को अपनी समस्याओं की आवाज बनने के लिए चुना है। लेकिन आज जब भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति में जनता को सबसे ज्यादा सहयोग की जरूरत है, तब रात में घंटों बिजली कटौती उनकी परेशानी को और बढ़ा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि चकिया में बिजली की ऐसी स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली, जिसमें एक घंटे के अंतराल पर बार-बार बिजली काटी जाए।
*अब सवाल जनता का नहीं, जवाबदेही का है*
बिजली विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में रात के समय कितने घंटे बिजली कट रही है और इसका वास्तविक कारण क्या है। साथ ही जनप्रतिनिधियों को भी जनता के बीच जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
क्योंकि बाढ़ के बीच अंधेरे में बैठी जनता को आश्वासन नहीं, व्यवस्था चाहिए।
सत्ता से सीधा सवाल
क्या चकिया की ग्रामीण जनता को बाढ़ के पानी के साथ-साथ बिजली कटौती में भी डूबने के लिए छोड़ दिया गया है?
*क्या पांच घंटे की रात की कटौती पर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी जवाब देंगे?*
और सबसे बड़ा सवाल—जब जनता संकट में है, तब उसका नेता उसके साथ खड़ा है या नहीं?
चकिया की जनता अब सिर्फ बिजली आने का इंतजार नहीं कर रही है—वह जवाब का इंतजार कर रही है।










