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जनभागीदारी, संवाद और विमर्श से बना भारतीय संविधान का लोकतांत्रिक स्वरूप

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वाराणसी। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से बुधवार को ‘भारतीय संविधान के निर्माण में जनभागीदारी’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। सामाजिक विज्ञान संकाय के स्मार्ट क्लास कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में यूनिवर्सिटी ऑफ हर्टफोर्डशायर, यूनाइटेड किंगडम के डॉ. अरविंद कुमार ने भारतीय संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया और उसमें जनता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता डॉ. अरविंद कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान केवल विधि विशेषज्ञों द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह देश की जनता की आकांक्षाओं, संघर्षों और सपनों का जीवंत प्रतिबिंब है। उन्होंने बताया कि संविधान सभा में लगभग दो वर्ष, 11 माह और 18 दिनों तक चले व्यापक विचार-विमर्श ने भारतीय संविधान को समावेशी और लोकतांत्रिक स्वरूप प्रदान किया।

उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त सुझावों, पत्रों, ज्ञापनों और जन-आंदोलनों ने संविधान के स्वरूप को प्रभावित किया। विशेष रूप से मौलिक अधिकारों और राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के निर्माण में जनभावनाओं एवं व्यापक सामाजिक विमर्श की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

विद्यार्थियों से संविधान को केवल अध्ययन का विषय न मानने का आह्वान करते हुए डॉ. कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता, समानता, बंधुत्व और न्याय जैसे संवैधानिक मूल्यों को दैनिक जीवन में आत्मसात करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता जागरूक और सक्रिय नागरिक सहभागिता पर निर्भर करती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता एवं संयोजन राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद आरिफ ने किया। इस अवसर पर डॉ. रेशम लाल, डॉ. विजय कुमार, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. ज्योति त्रिपाठी, डॉ. सी.के. मणि पाण्डेय, डॉ. ज्ञान प्रकाश पाण्डेय, डॉ. विजय कुमार सिंह सहित विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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