वाराणसी। विश्वविख्यात सांस्कृतिक आयोजन ‘सुबह-ए-बनारस’ मंगलवार, 30 जून को एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय संगीत, संस्कृत और सनातन सांस्कृतिक परंपरा के मधुर सुरों से गुंजायमान होगा। प्रातः 5:15 बजे अस्सी घाट पर सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के युवा कलाकार अपनी शास्त्रीय गायन प्रतिभा से श्रद्धालुओं और संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) बिहारी लाल शर्मा के नेतृत्व में संस्कृत, भारतीय संस्कृति एवं शास्त्रीय कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर किए जा रहे प्रयासों की कड़ी के रूप में इस विशेष सांगीतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन काशी की सांस्कृतिक परंपरा और भारतीय संगीत की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा।
कार्यक्रम का निर्देशन संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. श्रुति उपाध्याय ने किया है। उनके मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के प्रतिभाशाली विद्यार्थी मानस तिवारी, अश्विनी शुक्ला, मुलायम सिंह यादव, गौरांश उपाध्याय सहित अन्य छात्र-छात्राएं भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविध प्रस्तुतियां देंगे। गंगा तट पर उगते सूर्य की प्रथम किरणों के बीच रागों की यह प्रस्तुति आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और संगीतमय वातावरण का सृजन करेगी।

‘सुबह-ए-बनारस’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि काशी की जीवंत सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर विश्वविद्यालय के युवा कलाकारों की प्रस्तुति भारतीय शास्त्रीय संगीत की गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
विश्वविद्यालय परिवार ने संगीत प्रेमियों, संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के अनुरागियों, विद्वानों, शोधार्थियों तथा नगरवासियों से इस गरिमामयी आयोजन में सहभागिता कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करने की अपील की है। इस आशय की जानकारी संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. श्रुति उपाध्याय ने जनसंपर्क विभाग के माध्यम से दी।









