वाराणसी। चंद्रा साहित्य परिषद (ट्रस्ट) के इंदिरानगर, चितईपुर स्थित कार्यालय में सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार स्वर्गीय सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’ की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के वरिष्ठ साहित्यकारों, कवियों, पत्रकारों एवं बुद्धिजीवियों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनकी साहित्यिक साधना और रचनात्मक अवदान को स्मरण किया।
श्रद्धांजलि सभा में कवयित्री माधुरी मिश्रा ने अपनी ग़ज़ल ‘नीम सी कड़वी हूँ’, डॉ. सविता सौरभ ने ‘रूठना आसान है’, डॉ. छोटेलाल सिंह ‘मनमीत’ ने ‘जाने वाला चला गया है’ तथा इंजी. राम नरेश ‘नरेश’ ने ‘बाग है, पर वो माली नहीं है यहाँ’ शीर्षक रचना प्रस्तुत कर स्वर्गीय ‘सिद्ध’ को श्रद्धासुमन अर्पित किए। अन्य कवियों ने भी गीत एवं ग़ज़लों के माध्यम से उनकी स्मृतियों को जीवंत करते हुए उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. सविता सौरभ ने कहा कि स्वर्गीय सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’ का साहित्यिक अवदान सदैव नई पीढ़ी के रचनाकारों का मार्गदर्शन करता रहेगा। वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह अन्ना ने कहा कि ‘सिद्ध’ केवल एक उत्कृष्ट ग़ज़लकार ही नहीं, बल्कि संवेदनशील साहित्य साधक थे। उनकी रचनाओं में समाज की पीड़ा, मानवीय संवेदनाएँ और जीवन का यथार्थ प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त होता है। उनका साहित्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

इस अवसर पर दीपक दबंग, गिरीश पांडेय, प्रियदर्शी अशोक सिंह मौर्य, नाथ सोनांचली, डॉ. कैलाश सिंह विकास, डॉ. छोटेलाल सिंह ‘मनमीत’, माधुरी मिश्रा, इंजी. राम नरेश ‘नरेश’ सहित उपस्थित साहित्यकारों एवं रचनाकारों ने स्वर्गीय ‘सिद्ध’ के व्यक्तित्व और कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन नाथ सोनांचली ने किया, जबकि इंजी. राम नरेश ‘नरेश’ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। श्रद्धांजलि सभा का समापन दो मिनट का मौन रखकर स्वर्गीय सिद्धनाथ शर्मा ‘सिद्ध’ की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए किया गया।









