वाराणसी, 20 अगस्त। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में गुरुवार को ‘हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास एवं वर्तमान चुनौतियां’ विषय पर विशेष व्याख्यान आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता राजीव गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, अरुणाचल प्रदेश के डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने हिन्दी पत्रकारिता की करीब दो शताब्दियों की विकास यात्रा, उसके सामाजिक-राजनीतिक सरोकारों और मौजूदा चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ. राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा ‘उदंत मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ हिन्दी पत्रकारिता का विधिवत आरंभ हुआ। उन्होंने भारतेंदु युग, द्विवेदी युग और गांधी युग की पत्रकारिता की प्रमुख विशेषताओं को रेखांकित करते हुए ‘उदंत मार्तण्ड’, ‘बनारस अखबार’, ‘बाला बोधिनी’, ‘प्रताप’ और ‘कर्मवीर’ जैसे महत्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि हिन्दी पत्रकारिता ने केवल साहित्यिक अभिव्यक्ति को मंच नहीं दिया, बल्कि सामाजिक सुधार, राजनीतिक जागरूकता और राष्ट्रवादी चेतना के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ब्रिटिश शासन के दौर में जनमत निर्माण और स्वतंत्रता आंदोलन को वैचारिक आधार देने में पत्रकारिता का योगदान उल्लेखनीय रहा। उन्होंने कहा कि “पत्रकारिता जल्दी में लिखा गया साहित्य है”, जिसका प्रभाव व्यापक और दूरगामी होता है।

मुख्य वक्ता ने विद्यार्थियों से भारतेंदु हरिश्चंद्र, महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, मदन मोहन मालवीय और जुगल किशोर शुक्ल के पत्रकारिता मूल्यों, आदर्शों एवं नैतिक सिद्धांतों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
डॉ. गिरीश दुबे ने भारतीय पत्रकारिता के प्रारंभिक दौर से लेकर वर्तमान समय तक की चुनौतियों पर विचार रखे। उन्होंने बदलते मीडिया परिदृश्य में पत्रकारिता के मूल्यों और दायित्वों को बनाए रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम का स्वागत वक्तव्य डॉ. प्रभा शंकर मिश्र ने दिया। संचालन डॉ. मनोहर लाल तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अजय वर्मा ने किया। इस अवसर पर डॉ. चन्द्रशील पाण्डेय, साजिया, कोमल, मुदित, पीयूष, कशिश, सानिया, समर, आशीष, अनमोल, राघव, दिलकशा, अमित सहित विभाग के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।










