वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व शुक्रवार को धार्मिक एवं सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। वाग्देवी मंदिर परिसर में आयोजित जन्म महोत्सव में वैदिक विधि-विधान से भगवान श्रीकृष्ण एवं मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इस दौरान भजन, कथा एवं श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित मनोहारी झांकी ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ आचार्य एवं दर्शन संकाय प्रमुख प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल तथा प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने विश्वकल्याण, संस्कृत एवं विश्वविद्यालय के अभ्युदय तथा स्वस्थ समाज के निर्माण की कामना के साथ भगवान श्रीकृष्ण और मां वाग्देवी की पूजा-अर्चना से किया।
प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पक्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का अवतार अन्याय, अहंकार और अत्याचार के शमन का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण के आदर्श व्यक्तित्व, उनके प्रेम, भक्ति, धर्म और जीवन-मूल्यों को स्मरण करने का अवसर है। श्रीकृष्ण का जीवन मानव को सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

वेदांत के आचार्य प्रो. सुधाकर मिश्र ने व्यास पीठ से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-दर्शन और उनके संदेश पर सारगर्भित उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का अवतरण केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि धर्म, सत्य, प्रेम और लोककल्याण की स्थापना का दिव्य संदेश है। जब समाज में अधर्म और अन्याय बढ़ता है, तब धर्म की पुनर्स्थापना के लिए ईश्वरीय शक्ति का प्राकट्य होता है।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने जीवन और श्रीमद्भगवद्गीता के माध्यम से मानवता को कर्म, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। परिस्थितियां कैसी भी हों, मनुष्य को विचलित हुए बिना अपने कर्तव्य का निष्ठापूर्वक पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यास पीठ ज्ञान, गुरु-परंपरा और भारतीय सनातन संस्कृति की जीवंत परंपरा का प्रतीक है। यहां से श्रीकृष्ण की कथा का श्रवण आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करता है।
प्रो. मिश्र ने उपस्थित श्रद्धालुओं से श्रीकृष्ण की लीलाओं और संदेश को केवल सुनने तक सीमित न रखने, बल्कि प्रेम, करुणा, सत्य, धर्म और कर्मयोग को जीवन में उतारने का आह्वान किया। उन्होंने समाज में सद्भाव, परिवारों में प्रेम, युवाओं में संस्कार तथा प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में धर्म एवं कर्तव्य की भावना के प्रकाश की कामना की।
प्रो. महेंद्र पांडेय ने जन्माष्टमी को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और आराधना का विशेष पर्व बताते हुए कहा कि यह उत्सव लोगों में भक्ति, प्रेम और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है।
संगीत विभाग की डॉ. श्रुति उपाध्याय एवं उनकी टीम ने श्रीकृष्ण को समर्पित मधुर भजनों और गीतों की प्रस्तुति दी। भक्ति संगीत से पूरा परिसर कृष्णमय हो उठा और उपस्थित लोग भावविभोर नजर आए।
वाग्देवी मंदिर के मंडप में सजाई गई श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित आकर्षक झांकी आयोजन का विशेष आकर्षण रही। श्रद्धालुओं ने झांकी के माध्यम से बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। आयोजन ने नई पीढ़ी को भारतीय धार्मिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने का भी संदेश दिया।
महोत्सव का संयोजन वेद विभागाध्यक्ष प्रो. महेंद्र पांडेय ने किया। पूजन आदि की व्यवस्था डॉ. सच्चिदानंद एवं संतोष दुबे ने संभाली। कार्यक्रम में प्रो. विजय कुमार पांडेय, डॉ. रविशंकर पांडेय, अजितेश द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय परिवार के शिक्षक, कर्मचारी एवं अन्य सदस्य उपस्थित रहे।










