वाराणसी। महमूरगंज स्थित शुभम लॉन में श्रीकाशी सत्संग सेवा समिति के तत्वावधान में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन कथा मर्मज्ञ पं. श्रीकान्त शर्मा ‘बालव्यास’ ने कहा कि कलियुग में यदि अमृत का रसपान करना है तो श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए। भागवत कथा में भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अमृत समाहित है। इसका श्रवण जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का श्रेष्ठ साधन है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कभी पुरानी नहीं होती, बल्कि प्रत्येक श्रवण के साथ इसका स्वरूप और संदेश नित नवीन अनुभूत होता है। जितनी बार कथा सुनी जाती है, उतनी ही बार भगवान की लीलाओं का नया भाव और मर्म सामने आता है। कथा का पुण्य कथा सुनने वाले और सुनाने वाले, दोनों को प्राप्त होता है।
बालव्यास ने कहा कि ब्रज का चरित्र प्रेम का महायोग है। भगवान को धन-संपत्ति नहीं, बल्कि धर्म और सदाचार प्रिय हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने कंस का वध धन या साम्राज्य प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि उसके अधर्म से प्रजा को मुक्ति दिलाने के लिए किया। कंस के वध के बाद उन्होंने मथुरा का राजपाट अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया।
कथा के दौरान श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह का प्रसंग आते ही श्रद्धालु भक्ति और उल्लास में डूब गए। विवाह की दिव्य झांकी के दर्शन कर भक्त भावविभोर हो उठे। ‘आओ मेरी सखियां, मुझे मेहंदी लगा दो’ सहित विभिन्न भक्ति गीतों पर श्रद्धालुओं ने जमकर नृत्य किया। पूरे पंडाल में जयकारों और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो गया।

इस अवसर पर अनूप सराफ, अवधेश खेमका, सुरेश तुलस्यान, अजय यादुका, संजीव अग्रवाल, पवन अग्रवाल, अमित अग्रवाल, राजेश अग्रवाल, राजेश गट्टानी, किशन केडिया, गोपाल अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। संचालन कृष्ण कुमार काबरा ने किया।










