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वंदे मातरम के 150 वर्ष पर 150 फीट की भव्य चित्रमाला तैयार

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वाराणसी। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश एवं संस्कृत विभाग के सौजन्य से वंदे मातरम गीत पर आधारित चित्रांकन कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला 15 से 17 दिसंबर 2025 तक महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के ललित कला विभाग परिसर में सम्पन्न हुई।

कार्यशाला में वंदे मातरम के चतुर्थ छन्द के प्रत्येक शब्द को चित्रात्मक रूप प्रदान किया गया। “तुमि धर्म” के अंतर्गत भगवान श्रीराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, महावीर, गुरु नानक जैसे धर्म के प्रतीक स्वरूपों का अंकन किया गया, जबकि “तुमि विद्या” खंड में ऋषि कणाद, कपिल, पतंजलि, शंकराचार्य, वेदव्यास, वाल्मीकि, सुश्रुत, चरक आदि महापुरुषों को चित्रित किया गया।

“तुमि मा शक्ति, तुमि भक्ति” के अंतर्गत देवी अनुसूया, आपला, घोषा, गार्गी सहित स्त्री शक्तियों के विराट स्वरूप को प्रदर्शित किया गया। वहीं “तुमि हृदि, तुमि मर्म” भाव के अनुरूप कबीर, तुलसीदास, लाहिड़ी महाशय, गुरु गोरखनाथ, चाणक्य, रामकृष्ण परमहंस, शारदा माता, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती जैसे संत-महापुरुषों का चित्रांकन हुआ।

राज्य ललित कला अकादमी के अध्यक्ष प्रो. सुनील कुमार विश्वकर्मा ने भारत माता का रेखांकन किया, जिसे समन्वयक डॉ. सुनील कुशवाहा ने रंगों में रूपांतरित किया। युवा चित्रकार डॉ. शशिकांत नाग के मार्गदर्शन में वरिष्ठ चित्रकार श्रीमती आशा सहित बलदाऊ वर्मा, रविशंकर उर्फ अर्जुन, आशीष राय और आज़ाद कपूर ने 30 फीट के वृहद फलक पर चित्रमाला का निर्माण किया।

उल्लेखनीय है कि वंदे मातरम के प्रत्येक छन्द पर उत्तर प्रदेश के पाँच स्थानों पर चित्रण कार्यशालाएं आयोजित की गईं, जिनमें चतुर्थ छन्द का दायित्व वाराणसी क्षेत्र के कलाकारों को सौंपा गया। सभी स्थानों की चित्रमालाओं को जोड़कर 150 फीट लंबा समेकित चित्र तैयार किया गया है, जिसका प्रदर्शन 24 जनवरी को लखनऊ स्थित प्रेरणा स्थल पर उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इस अवसर पर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं राज्यपाल आनंदी बेन पटेल द्वारा चित्र का अवलोकन प्रस्तावित है।

कार्यशाला में अंकित कुमार, सुरेश कुमार सौरभ, प्रवीण प्रकाश, हिमांशु, आशीष विश्वकर्मा सहित अनेक सहयोगी कलाकारों की सहभागिता रही। ललित कला विभाग के अध्यापकगण और बड़ी संख्या में कला विद्यार्थियों ने भी कार्यशाला का अवलोकन किया। समापन अवसर पर डॉ. शशिकांत नाग ने सभी कलाकारों और आयोजकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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