चंदौली। महुआरी खास गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास पंडित राधारमणाचार्य ने राजा परीक्षित को मिले श्राप, उनके पश्चाताप और भगवान की शरण में पहुंचने के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने शुकदेव जी के आगमन और उनके द्वारा राजा परीक्षित को दिए गए आध्यात्मिक ज्ञान का प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भक्ति और जीवन के वास्तविक उद्देश्य से परिचित कराया।
कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन ईश्वर की भक्ति और सत्कर्म जीवन को सार्थक बनाते हैं। राजा परीक्षित के प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि जीवन में हुई भूल का अहसास होने पर पश्चाताप के साथ ईश्वर की शरण ग्रहण करना ही मनुष्य के लिए कल्याण का मार्ग है।
इसके बाद कथा में भीष्म पितामह द्वारा भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति और ध्रुव चरित्र का विस्तार से वर्णन किया गया। ध्रुव की अटूट भक्ति और दृढ़ संकल्प का प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। कथा के दौरान भक्ति गीतों और भगवान के जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

कथा के समापन पर विधिवत आरती की गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। आरती के दौरान पूरा कथा पंडाल श्रद्धा और भक्ति के माहौल में डूबा नजर आया।
भागवत कथा के साथ यज्ञ का आयोजन भी किया जा रहा है। यज्ञाचार्य पंडित सूर्य मुनि तिवारी अपने सहयोगी आचार्य अनिल तिवारी, अमन तिवारी, मनोज तिवारी और विशाल तिवारी के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यज्ञ की विधि संपन्न करा रहे हैं। यज्ञ स्थल पर गूंज रहे वैदिक मंत्रों और कथा के आध्यात्मिक वातावरण से महुआरी खास गांव का माहौल पूरी तरह भक्तिमय बना हुआ है।










