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प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी की रचनाओं में राष्ट्रीय चेतना की सशक्त अभिव्यक्ति

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वाराणसी, 25 अगस्त। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के संस्कृत विभाग एवं रामकुमारी देवी स्मृति शोध संस्था, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को विभाग के पूर्व आचार्य महामहोपाध्याय प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी की 79वीं जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मानविकी संकाय स्थित स्मार्ट कक्ष में आयोजित संगोष्ठी में विद्वानों ने प्रो. द्विवेदी के जीवन, साहित्यिक योगदान और उनकी कृतियों में निहित राष्ट्रीय चेतना के विविध आयामों पर विचार व्यक्त किए।

संगोष्ठी का आयोजन कुलपति प्रो. आनंद कुमार त्यागी के संरक्षण एवं निर्देशन में हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। इसके बाद अतिथियों ने महात्मा गांधी, शिवप्रसाद गुप्त एवं प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। रामकुमारी देवी स्मृति शोध संस्था की सचिव डॉ. श्रुति प्रकाश द्विवेदी ने अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंटकर स्वागत किया।

संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के आचार्य प्रो. हरिराम मिश्र ने प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी की कृतियों में अभिव्यक्त राष्ट्रीय चेतना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि उनकी साहित्यिक रचनाओं में राष्ट्रीय दृष्टि के साथ भारतीय सांस्कृतिक चेतना के विविध आयाम प्रभावी रूप से उभरते हैं।

काशी विद्यापीठ के पूर्व आचार्य प्रो. श्रद्धानंद ने प्रो. द्विवेदी से जुड़े संस्मरण साझा करते हुए उन्हें ‘पुरानवीन कवि’ की संज्ञा दी। रामकुमारी देवी स्मृति शोध संस्था के अध्यक्ष प्रो. वंशीधर पाण्डेय ने कहा कि प्रो. द्विवेदी की रचनाओं में सामाजिक एकता और समरसता का संदेश निहित है, जो राष्ट्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

काशी विद्वत् परिषद, काशी के अध्यक्ष एवं सारस्वत अतिथि प्रो. रामनारायण द्विवेदी ने कहा कि प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी संस्कृत के किसी एक क्षेत्र तक सीमित विद्वान नहीं थे, बल्कि संस्कृत वाङ्मय के निष्णात विद्वान और आशुकवि थे। उनकी कृतियों में भारतीय संस्कृति का सहज, प्रभावशाली और जीवंत चित्रण देखने को मिलता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रो. सीमा यादव ने की। उन्होंने कहा कि प्रो. प्रभुनाथ द्विवेदी की कृतियां देदीप्यमान सूर्य की भांति साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करती हैं।

संगोष्ठी का संचालन डॉ. शमा मिश्रा ने किया। अतिथियों का स्वागत डॉ. उपेन्द्र देव पाण्डेय, धन्यवाद ज्ञापन प्रो. अनीता तथा बीज वक्तव्य डॉ. दीपक कुमार ने प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संस्कृत विभाग की डॉ. विभा सिंह, डॉ. कुमुद कुमार पाण्डेय, हिंदी विभाग के आचार्य प्रो. अनुकूल चंद्र राय, प्रो. रामाश्रय सिंह, डॉ. प्रभा शंकर मिश्र सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, अतिथिगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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