वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के कार्यकाल में तीन वर्ष का विस्तार किया गया है। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 की धारा-12 की उपधारा-1 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह कार्यकाल-विस्तार किया है। सोमवार को इस संबंध में पत्र प्राप्त होने के बाद कुलपति प्रो. शर्मा ने कुलाधिपति के प्रति आभार जताते हुए इसे अपने लिए व्यक्तिगत सम्मान के बजाय पूरे विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक साधना का सम्मान बताया।
प्रो. शर्मा ने कहा कि कुलाधिपति द्वारा उन पर जताया गया विश्वास उनके लिए नई जिम्मेदारी, अधिक उत्तरदायित्व और नए संकल्प का अवसर है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां किसी एक व्यक्ति के प्रयास का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि आचार्यों, शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सामूहिक निष्ठा एवं परिश्रम से संस्थान आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा, “महामहिम कुलाधिपति द्वारा मुझ पर व्यक्त विश्वास को मैं व्यक्तिगत सम्मान के रूप में नहीं, बल्कि सम्पूर्ण विश्वविद्यालय परिवार की सामूहिक साधना के सम्मान के रूप में ग्रहण करता हूं। यह विश्वास हम सभी को और अधिक निष्ठा एवं समर्पण के साथ काम करने की प्रेरणा देता है।”

कुलपति ने राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के संस्कृत, शिक्षा, भारतीय ज्ञान-परंपरा और विश्वविद्यालयों के विकास के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि राजभवन का मार्गदर्शन विश्वविद्यालय के लिए लगातार प्रेरणा और दिशा का स्रोत रहा है। प्रो. शर्मा ने राजभवन के एसीएस स्तर के ओएसडी सुधीर महादेव बोबड़े, ओएसडी डॉ. पंकज एल. जानी और ओएसडी अशोक देसाई सहित राजभवन के सभी अधिकारियों के प्रति भी सहयोग और मार्गदर्शन के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यकाल विस्तार के बाद अगले तीन वर्षों की प्राथमिकताएं बताते हुए प्रो. शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध की उत्कृष्टता, भारतीय ज्ञान-परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन, दुर्लभ पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटल तकनीक के प्रभावी उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अकादमिक संस्थानों से सहयोग बढ़ाने तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए नए प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय केवल एक शिक्षण संस्थान नहीं, बल्कि संस्कृत भाषा, शास्त्र, दर्शन, भारतीय संस्कृति और ज्ञान-विज्ञान की गौरवशाली परंपरा का प्रमुख केंद्र है। इस विरासत को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप और अधिक सशक्त बनाना उनकी प्राथमिकता होगी।
कुलपति ने विश्वविद्यालय परिवार से अपने-अपने दायित्वों का पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ निर्वहन करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की प्रगति किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं हो सकती। यह सामूहिक साधना से निर्मित होती है और सामूहिक संकल्प से ही उसे नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि तीन वर्ष का कार्यकाल-विस्तार उनके लिए किसी व्यक्तिगत उपलब्धि का अंत नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की सेवा और उसकी गौरवशाली परंपरा को और समृद्ध करने के नए दायित्व का आरंभ है।










