नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार से तीन देशों जॉर्डन, इथियोपिया और ओमान के महत्वपूर्ण विदेश दौरे पर रवाना हो रहे हैं। इस बहुपक्षीय यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों तक ले जाना, व्यापार-निवेश, रक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करना है। दौरे के पहले चरण में प्रधानमंत्री मोदी किंग अब्दुल्ला द्वितीय बिन अल हुसैन के निमंत्रण पर जॉर्डन पहुंचेंगे। दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री की किंग अब्दुल्ला द्वितीय के साथ व्यापक वार्ता होगी, जिसमें भारत-जॉर्डन संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी। साथ ही पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान होगा। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार यह यात्रा भारत और जॉर्डन के बीच राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर हो रही है। यह अवसर दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को और प्रगाढ़ करने, व्यापार, शिक्षा, रक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए रास्ते तलाशने के साथ-साथ क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता के प्रति साझा प्रतिबद्धता को दोहराने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा।दौरे के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी 16 दिसंबर से इथियोपिया के राजकीय दौरे पर जाएंगे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे को भारत-अफ्रीका संबंधों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। यह प्रधानमंत्री मोदी का इथियोपिया का पहला दौरा होगा। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, क्षमता निर्माण, स्वास्थ्य, डिजिटल सहयोग और विकास साझेदारी से जुड़े मुद्दों पर समझौते होने की संभावना है। यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री ओमान जाएंगे, जहां भारत-ओमान के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर रहेगा। ऊर्जा, निवेश, समुद्री सुरक्षा और भारतीय प्रवासी समुदाय से जुड़े विषयों पर चर्चा के साथ कई समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का यह तीन देशों का दौरा भारत की सक्रिय कूटनीति को नई गति देने, मित्र देशों के साथ साझेदारी को विस्तार देने और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका को और सशक्त करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।









