वाराणसी। धर्मनगरी काशी में महमूरगंज स्थित बालाजी पैलेस सभागार में आयोजित सप्त दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा का समापन रविवार को भक्तिमय वातावरण में हुआ। श्री भागवत चार धाम सेवा समिति, कोलकाता के तत्वावधान में आयोजित कथा के अंतिम दिन कथावाचक पंडित अमर बिहारी पाठक महाराज ने सनातन धर्म में तिलक, रुद्राक्ष एवं भगवान शिव के नाम के आध्यात्मिक महत्व का विस्तृत वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथावाचक ने कहा कि तिलक केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का परिचायक है। वहीं रुद्राक्ष धारण करने से मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने भगवान शिव के नाम स्मरण को कलियुग में मोक्ष प्राप्ति का सरल माध्यम बताते हुए कहा कि शिवभक्ति मानव जीवन को नई दिशा प्रदान करती है। कथा के दौरान पूरा सभागार “हर-हर महादेव” के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
संस्था से जुड़े आनंद अग्रवाल, गोपाल अग्रवाल, राजकुमार गोयल, दीपक रुगटा, श्रवण अग्रवाल, जितेंद्र अग्रवाल, मुरारी केडिया, संजय लोहिया एवं तुलसीराम राजगढ़िया ने संयुक्त रूप से बताया कि संस्था का उद्देश्य कथा एवं धार्मिक आयोजनों के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों में नई ऊर्जा, सकारात्मक चेतना एवं आध्यात्मिक जागरूकता का संचार करना है। उन्होंने बताया कि संस्था विगत 30-35 वर्षों से देश के विभिन्न तीर्थस्थलों पर रामायण, श्रीमद्भागवत एवं शिवपुराण कथाओं का आयोजन कराती आ रही है तथा भविष्य में देवी भागवत कथा कराने का भी संकल्प लिया गया है।

उन्होंने बताया कि कोलकाता में “पाकुड़िया सालासर धाम” के नाम से सालासर हनुमान मंदिर का निर्माण कराया गया है, जहां आज भी अखंड ज्योति प्रज्वलित रहती है। मंदिर परिसर में कई बार सवा लाख हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन हो चुका है। प्रत्येक वर्ष जनवरी माह में रामचरितमानस पाठ एवं 51 कुंडीय महायज्ञ का आयोजन किया जाता है, जिसमें 251 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा सुंदरकांड के मंत्रों से नौ दिनों तक हवन संपन्न कराया जाता है।
संस्था पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान समय में विश्वभर में व्याप्त युद्ध और अशांति के वातावरण को देखते हुए पाकुड़िया सालासर धाम में “सवा करोड़ हनुमान चालीसा” पाठ कराने का संकल्प लिया गया है। इसकी औपचारिक घोषणा दीपावली के बाद की जाएगी। उनका कहना था कि इस आयोजन का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सनातन संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना है।
कथा में काशी सहित कोलकाता, दरभंगा, सूरत, दिल्ली, गुवाहाटी एवं बेंगलुरु से पहुंचे सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।









