वाराणसी। हिंदी पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को इण्डियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएजे) एवं सामाजिक विज्ञान विभाग, सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय स्थित योग साधना केंद्र में राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं 31वें राष्ट्रीय अलंकरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में “वर्तमान वैश्विक संकट : मीडिया की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ-साथ “काशीरत्न”, “शान-ए-काशी”, “आईएजे लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड” तथा “आईएजे नागरिक अभिनंदन” सम्मान प्रदान किए गए। समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली 20 विभूतियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने की। मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल (कालाजार रोग विशेषज्ञ) रहे। विशिष्ट अतिथियों में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट एवं काशीरत्न ओमप्रकाश शर्मा तथा शैक्षणिक सेविका श्रीमती संतोषी शुक्ला उपस्थित रहीं। अतिथियों ने सम्मानित विभूतियों को शाल, प्रमाण-पत्र, स्मृति चिन्ह एवं पगड़ी प्रदान कर अलंकृत किया।
समारोह का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। राष्ट्रीय संगोष्ठी का विषय प्रवेश सामाजिक विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने किया। उन्होंने मीडिया की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सोशल मीडिया को पूरी तरह जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, बल्कि प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की जवाबदेही अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मीडिया की एक खबर से शेयर बाजार तक प्रभावित हो जाता है, इसलिए जिम्मेदार पत्रकारिता समय की आवश्यकता है।

मुख्य अतिथि पद्मश्री प्रो. श्याम सुंदर अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2008-2010 से पूर्व कालाजार रोग से हजारों लोग प्रभावित होते थे, लेकिन शोध एवं नई दवाओं के प्रभाव से वर्तमान में इसकी संख्या घटकर लगभग 400 से भी कम रह गई है। उन्होंने विश्वास जताया कि निकट भविष्य में यह संख्या शून्य तक पहुंच सकती है।
आकाशवाणी वाराणसी के कार्यक्रम प्रमुख एवं सम्मानित विभूति अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा कि मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है और आमजन सत्य एवं सटीक जानकारी की अपेक्षा रखते हैं। उन्होंने कहा कि त्वरित सूचना प्रसारण की प्रतिस्पर्धा में कई बार अपुष्ट सूचनाएं प्रसारित हो जाती हैं, जिसका समाज पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने मीडिया से नैतिकता, निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया।
प्रो. राजनाथ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कई समाचार चैनल रूस-यूक्रेन युद्ध से पहले ही तृतीय विश्व युद्ध जैसा वातावरण प्रस्तुत करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शक्तियां दूसरे देशों की संपदा पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रही हैं। वहीं, अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के पूर्व कुलपति प्रो. रजनीश शुक्ल ने हिंदी पत्रकारिता के इतिहास का उल्लेख करते हुए “उदन्त मार्तण्ड” का संदर्भ दिया और कहा कि उदारीकरण के बाद मीडिया जगत में व्यापक परिवर्तन आया है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि मीडिया कर्मियों को निर्भीकता एवं निष्पक्षता के साथ तथ्यों का मूल्यांकन कर समाज के समक्ष प्रस्तुत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सकारात्मक और जिम्मेदार पत्रकारिता समाज को दिशा देने का कार्य करती है।
समारोह में “दृष्टि” वार्षिक पत्रिका का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया। पत्रिका के संपादक डॉ. नितेश कुमार तथा सहयोगी जफरुद्दीन फारुकी रहे। राष्ट्रीय महामंत्री अरविंद विश्वकर्मा ने संस्था की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की। अतिथियों का स्वागत प्रो. शैलेश कुमार मिश्र ने किया। कार्यक्रम का संचालन आशुतोष शास्त्री एवं डॉ. कैलाश सिंह विकास ने संयुक्त रूप से किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रो. राजनाथ ने प्रस्तुत किया। आयोजन संयोजन आईएजे काशीरत्न संयोजक मोतीलाल गुप्ता द्वारा किया गया।
राजेश्वर पाण्डेय (समाज सेवा), डॉ. ममता टंडन (कत्थक नृत्य एवं संगीत सेवा), अशोक कुमार पाण्डेय (आकाशवाणी वाराणसी), डॉ. रविशंकर पाण्डेय (संस्कृत व्याकरण सेवा), डॉ. वैभव जायसवाल (बाल रोग विशेषज्ञ, बीएचयू), विनोद दीक्षित (शिक्षा सेवा), अनिल कसेरा (धातु कला सेवा), महंत बलविंदर सिंह (समाज सेवा) एवं डॉ. अजीत सिंह (आर्थोपेडिक सेवा)।
गिरीश पाण्डेय ‘काशिकेय’ (साहित्य सेवा), हीरालाल चौरसिया (पत्रकारिता सेवा), अमित कुमार पाण्डेय (पत्रकारिता सेवा), सना सलीम (उद्घोषिका एवं पत्रकारिता सेवा), विजयता सचदेवा मंडल (मिसेज एशिया विनर), कल्पना तिवारी (शिक्षा सेवा), नाजिश खान (कलात्मक एवं समाज सेवा), अंशुमान दुबे एडवोकेट (विधि सेवा) एवं इजी प्रकाम्य ओशो (मार्केटिंग एवं समाज सेवा)।
डॉ. आनंद पाल राय को शिक्षा सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु “आईएजे लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड” से सम्मानित किया गया। डॉ. सुभाष चंद्र का नागरिक अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम में डॉ. निशा रानी अग्रवाल, प्रो. जितेंद्र कुमार, मोहम्मद दाऊद, सत्यनारायण द्विवेदी एडवोकेट, डॉ. शुभम कुमार सेठ, गीता राय, जियाउद्दीन फारुकी, राधा सेठ, अर्जुन सिंह, आशीर्वाद सिंह, आनंद कुमार सिंह, मुशीरुल हसन सिद्दीकी, कौशल कुमार मिश्र, विक्रम कुमार, विनय कुमार श्रीवास्तव, राजू वर्मा, विक्की वर्मा, संजय पाण्डेय, तेजस कुमार सिंह, डॉ. जिनेश कुमार, डॉ. चन्द्रभान, डॉ. अमित कुमार दुबे सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, पत्रकार, समाजसेवी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।









