वाराणसी। जनप्रतिनिधियों का जनता के बीच पहुंचना कोई नई बात नहीं है, लेकिन शहर दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी ने इसे अपनी दैनिक कार्यशैली का अभिन्न हिस्सा बना लिया है। “गली वॉक” के माध्यम से वह प्रतिदिन अपने क्षेत्र की गलियों, मोहल्लों और पक्के महालों में पैदल भ्रमण कर सीधे जनता से संवाद स्थापित कर रहे हैं।
प्रतिदिन सुबह लगभग 15 से 20 किलोमीटर तक पैदल चलकर विधायक डॉ. नीलकंठ तिवारी स्थानीय नागरिकों से मुलाकात करते हैं। ठेठ बनारसी अंदाज में “का हो, का हाल बा…” जैसे आत्मीय संबोधनों के साथ लोगों का हालचाल लेना और उनकी समस्याएं सुनना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि जनता भी उन्हें अपने बीच सहज रूप में पाकर प्रसन्न नजर आती है।
दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान के साथ-साथ तंग गलियों और पक्के महालों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की गलियां अपने अनोखे नामों के कारण भी चर्चा में रहती हैं, जैसे सुग्गा गली, चूहा गली आदि। इन्हीं गलियों में विधायक नीलकंठ तिवारी पैदल भ्रमण करते हुए स्थानीय व्यवस्थाओं का जायजा लेते हैं।

सुबह के समय पक्के बनारसियों और अड़ीबाजों के बीच पहुंचने पर “महादेव गुरु”, “गुरु पालागी” जैसे पारंपरिक बनारसी संबोधन वातावरण को आत्मीय बना देते हैं। कई बार स्थानीय बुजुर्गों के साथ बैठकी और बनारसी खान-पान का आनंद लेते हुए विधायक पुरानी काशी की परंपराओं और समस्याओं को भी करीब से समझते हैं।
भ्रमण के दौरान जहां कहीं पानी, बिजली, सीवर या पथ प्रकाश जैसी मूलभूत समस्याएं दिखाई देती हैं, उन्हें वह तत्काल अपनी डायरी में नोट कर संबंधित अधिकारियों से समाधान कराने का प्रयास करते हैं। प्रधानमंत्री की अपील के अनुरूप बड़े वाहनों का उपयोग कम कर तंग गलियों में पैदल पहुंचना भी लोगों को खासा प्रभावित कर रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विधायक का यह “गली वॉक” केवल निरीक्षण भर नहीं, बल्कि जनता के साथ सीधे जुड़ाव और समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बन चुका है।









