वाराणसी। पश्चिम बंगाल चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत के बाद देशभर में राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। विभिन्न राजनीतिक एवं धार्मिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। इसी क्रम में श्री काशी सुमेरूपीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने चुनाव परिणामों को लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम जनता की जागरूकता और लोकतांत्रिक भागीदारी का प्रमाण हैं। आज के डिजिटल युग में मतदाता पहले की अपेक्षा अधिक जागरूक हुआ है और वह स्वतंत्र रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस बार बंगाल में हुए उच्च मतदान प्रतिशत ने यह सिद्ध कर दिया है कि लोगों की लोकतंत्र में आस्था और विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।
शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि जब समाज संगठित होकर निर्णय लेता है, तब सकारात्मक परिवर्तन संभव होते हैं। उन्होंने कहा कि जो शक्तियां धर्म, संस्कृति और परंपराओं के विरुद्ध कार्य करती हैं, वे अंततः कमजोर पड़ जाती हैं।

तमिलनाडु की राजनीति का उल्लेख करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के पुराने बयानों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि धर्म के प्रति नकारात्मक सोच समाज में विभाजन पैदा कर सकती है। ब्राह्मण कोई जाति नहीं, बल्कि एक विचारधारा है, जिसका उद्देश्य किसी विशेष वर्ग या समुदाय का हित नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज और समस्त जीवों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करना है।









