वाराणसी/चंदौली। उत्तर प्रदेश के चंदौली-वाराणसी सीमा क्षेत्र के ग्रामीणों ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर निर्माण की अनुमति न मिलने से आक्रोश जताते हुए शुक्रवार को गोलघर स्थित पराड़कर स्मृति भवन में प्रेस वार्ता की।
मामला नियामताबाद विकास खंड के ग्राम सभा कुंडा खुर्द और भिसौंडी से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों का आरोप है कि वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) के नियमों के चलते वे अपने ही खेतों में घर नहीं बना पा रहे हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, उनकी जमीनें गंगा नदी से करीब 1500 मीटर दूरी पर स्थित हैं और बाढ़ का कोई खतरा नहीं रहता, फिर भी निर्माण पर रोक लगी हुई है। वहीं, समीपवर्ती गांव कुंडा कला में 500 मीटर तक आवासीय क्षेत्र घोषित होने से ग्रामीणों ने भेदभाव का आरोप लगाया है।

उन्होंने बताया कि पड़ाव-सहजौर मार्ग के दक्षिण हिस्से की लगभग 50 प्रतिशत भूमि पहले ही राजकीय कार्यों के लिए आवंटित हो चुकी है, जिससे निर्माण के लिए उपलब्ध जमीन और सीमित हो गई है।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने कहा कि इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को कई बार पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उन्होंने भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए समानता के अधिकार के उल्लंघन की बात कही।
ग्रामीणों की मांग है कि पड़ाव-सहजौर मार्ग के उत्तर दिशा में 500 मीटर तक की भूमि को आवासीय या मिश्रित भूमि के रूप में घोषित किया जाए, ताकि वे अपने घर बना सकें।
प्रेस वार्ता में ग्राम भिसौंडी के प्रधान प्रतिनिधि सत्य प्रकाश यादव, ग्राम कलाखुर्द के प्रधान प्रतिनिधि अखिलेश यादव, चंद्रजीत यादव सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे।








