वाराणसी, 12 अप्रैल 2026। धम्म प्रशिक्षण केंद्र द्वारा विपश्यना हाल, थाई बौद्ध विहार, सारनाथ में बोधिसत्व भारतरत्न डॉ भीमराव आंबेडकर की 135वीं जयंती श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत परमपूज्य भदन्त गुरु धम्मो महाथेरो जी द्वारा त्रिसरण एवं पंचशील प्रदान कर की गई।
इस अवसर पर आयोजित संगोष्ठी में “बोधिसत्व डॉ भीमराव आंबेडकर का जीवन संघर्ष एवं हमारा उत्तरदायित्व” विषय पर धम्म देशना देते हुए भंते जी ने कहा कि बाबा साहेब ने आजीवन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के लिए संघर्ष किया तथा शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम बताया। उन्होंने “शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो” का संदेश देते हुए कहा कि उनका जीवन विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ संकल्प और परिश्रम से सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा देता है। साथ ही उन्होंने 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर में हुई ऐतिहासिक धम्म क्रांति पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।
डा. विनोद कुमार, वरिष्ठ सर्जन, सार्थक सर्जिकल हॉस्पिटल, पहाड़िया ने कहा कि संविधान लागू होने के 75 वर्ष बाद भी बाबा साहेब के विचार और संघर्ष जीवंत हैं तथा आज भी लोग अपने अधिकारों के लिए उनके विचारों से प्रेरणा लेकर संघर्ष कर रहे हैं। जे.पी. बौद्ध जी ने कहा कि बाबा साहेब का सबसे बड़ा योगदान यह है कि उन्होंने इंसान को इंसान होने का एहसास कराया। आर.डी. प्रसाद जी ने कहा कि बाबा साहेब जाति-विहीन एवं वर्ग-विहीन समाज की स्थापना चाहते थे, जिसके लिए समता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुता पर आधारित समाज का निर्माण आवश्यक है। कैप्टन साहब ने वर्तमान समय में बढ़ती गरीबी, बेरोजगारी, जातिगत हिंसा, महिला उत्पीड़न और भ्रष्टाचार पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन समस्याओं का समाधान केवल बाबा साहेब के बताए मार्ग पर चलकर ही संभव है। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता हरि प्रसाद ने की तथा संचालन डॉ. सन्तोष कुमार ने किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से डॉ. अनिल कुमार (डायरेक्टर, सौभाग्य दीप हॉस्पिटल, गंगापुर), जी.एल. सिंह, लाल बहादुर, अमरनाथ मौर्य, ललित मौर्य, जय प्रकाश, राजकुमारी, तारा देवी, इंजी. आनन्द सेन, इंजी. अजित कुमार, पूर्व विधायक शिवबोध राम एवं विजय भाष्कर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









