वाराणसी। धर्मनगरी काशी में स्थित काशी कामरूप मठ दशाश्वमेध में आयोजित दो दिवसीय तिरोधन एवं निर्वाण तिथि महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के बीच सम्पन्न हुआ। ब्रह्मलीन स्वामी अच्युतानंद तीर्थ महाराज तथा ब्रह्मलीन स्वामी बाणेश्वरानंद तीर्थ महाराज के तिरोधान पूजन के द्वितीय दिवस 24 फरवरी को विविध धार्मिक अनुष्ठानों के साथ भव्य कार्यक्रम आयोजित किए गए।
प्रातःकाल भगवान पूर्णेश्वर महादेव का विधि-विधान से अभिषेक किया गया। इसके उपरांत गुरुजी के तैलचित्र को सुसज्जित पालकी में विराजमान कर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा मठ परिसर से प्रारंभ होकर नौका द्वारा राजेंद्र प्रसाद घाट से हरिश्चंद्र घाट पहुंची। वहां से यात्रा आगे बढ़ते हुए मणिकर्णिका घाट और नमो घाट होते हुए पुनः दशाश्वमेध घाट पहुंची। संपूर्ण मार्ग में श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए गुरु महिमा का गुणगान करते रहे। वातावरण ‘हर-हर महादेव’ के उद्घोष से गुंजायमान रहा।
दोपहर में गुरु चरण पादुका पूजन के उपरांत काशी के विभिन्न मठों से पधारे सैकड़ों संन्यासियों का समष्टि भंडारा आयोजित किया गया। मठ महंत स्वामी शुद्धानंद तीर्थ ने स्वयं संतों का पूजन कर उन्हें फल, वस्त्र, मिठाई एवं दक्षिणा अर्पित कर सम्मानपूर्वक विदाई दी। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा का संरक्षण ही सनातन धर्म की सुदृढ़ नींव है और ऐसे आयोजन समाज को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान करते हैं।

सांध्यकाल में भव्य संगीत कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें भक्तों ने भक्ति रस में डूबकर गुरु महाराज का स्मरण किया। दो दिवसीय महोत्सव में जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती, जपेश्वरानंद तीर्थ, आनंद स्वरूप मणिदीप स्वामी, ब्रह्मचारी सुधास्वामी, डॉ गणेश दत्त शास्त्री, डॉ विनोद राव पाठक, डॉ पवन कुमार शुक्ला, डॉ शंभु लाल शर्मा, प्रशांत शर्मा सहित देशभर से आए श्रद्धालुओं ने सहभागिता कर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
आध्यात्मिक उल्लास, वैदिक मंत्रोच्चार और संतों के सान्निध्य में संपन्न यह तिथि पूजन महोत्सव श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय बन गया।









