वाराणसी। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, आधुनिक और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) एवं एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) की समीक्षा बैठक के दौरान स्पष्ट निर्देश दिए कि अब विवेचना प्रणाली में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
कमिश्नर ने कहा कि क्राइम ब्रांच अब केवल लंबित मामलों के निस्तारण का केंद्र नहीं रहेगी, बल्कि इसकी कार्यशैली केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की तर्ज पर पेशेवर, तकनीकी और साक्ष्य आधारित होगी। प्रत्येक मामले की जांच गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ की जाएगी।इस दौरान उन्होंने कहा— “हमारा लक्ष्य केवल केस सुलझाना नहीं, बल्कि न्याय की ऐसी मिसाल पेश करना है जिससे वाराणसी की जनता खुद को सुरक्षित महसूस करे।”
कमिश्नर ने निर्देश दिया कि जिन मामलों की विवेचना क्राइम ब्रांच को सौंपी जाए, उनमें पीड़ितों को शीघ्र न्याय का भरोसा मिले और अपराधियों के मन में कानून का भय स्पष्ट रूप से दिखाई दे। उन्होंने कहा कि विवेचना के दौरान “दूध का दूध और पानी का पानी” होना चाहिए। बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि अब विवेचना उन्हीं अधिकारियों को सौंपी जाएगी जिन्हें कानून की गहरी समझ के साथ आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों का व्यावहारिक ज्ञान हो। अनुभव और दक्षता के आधार पर ही जांच की जिम्मेदारी तय की जाएगी।

विवेचना में देरी या लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। कमिश्नर ने कहा कि गुणवत्ता से समझौता करने वालों के लिए कमिश्नरेट में कोई स्थान नहीं है। बैठक के दौरान एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) के सराहनीय कार्य की प्रशंसा की गई। टीम ने बीते तीन वर्षों से लापता 6 बालिकाओं को सुरक्षित बरामद किया है। आंकड़ों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने वर्ष 2025 में 49 तथा वर्ष 2026 में जनवरी माह तक 6 महत्वपूर्ण मामलों का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण किया है।
पुलिस कमिश्नर ने विवेचना में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज एवं फॉरेंसिक जांच के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया। साथ ही सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) को निर्देशित किया कि वे प्रतिदिन लंबित मामलों की समीक्षा कर उसकी रिपोर्ट सीधे पुलिस कमिश्नर को प्रस्तुत करें।









