वाराणसी। चितईपुर–अमरा अखरी बाईपास मार्ग पर वर्षोवा हॉस्पिटल के बगल में खुलेआम मांस की बिक्री अब केवल अवैध कारोबार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक मर्यादा और कानून व्यवस्था को भी खुली चुनौती देती नजर आ रही है। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों के अनुसार यहां कसाई बेखौफ होकर कटे हुए बकरों को खुले में टांग देते हैं। नियमों के अनुसार मांस बिक्री स्थल पर हरे रंग के पर्दे का उपयोग अनिवार्य है, लेकिन यहां यह पर्दा केवल औपचारिकता बनकर रह गया है और तमाशबीन की भूमिका निभा रहा है।
सड़क से गुजरने वाले लोग, महिलाएं और बच्चे खुले में लटकते कटे जानवरों को देखने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे न केवल मानसिक असहजता बढ़ती है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन होता है। अस्पताल के समीप इस प्रकार का दृश्य मरीजों और उनके परिजनों के लिए भी अत्यंत पीड़ादायक साबित हो रहा है।
इसके साथ ही जानवरों के अवशेष खुले में फेंके जाने से लगातार दुर्गंध फैलती रहती है। इन्हीं अवशेषों की तलाश में आवारा कुत्ते झुंड बनाकर जमा हो जाते हैं। भोजन को लेकर आपसी संघर्ष के दौरान कुत्ते अचानक सड़क पर आ जाते हैं, जिससे वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाने पड़ते हैं और कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अवैध मांस बिक्री स्वास्थ्य, स्वच्छता और नगर निगम के नियमों का खुला उल्लंघन है। इसके बावजूद वर्षों से यह कारोबार प्रशासन की नाक के नीचे निर्बाध रूप से चल रहा है। नागरिकों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग सब कुछ देखकर भी आंखें मूंदे हुए हैं।
क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि अवैध मांस बिक्री पर तत्काल रोक लगाई जाए, हरे पर्दे सहित सभी निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, नियमित निरीक्षण हो और नियमों की अवहेलना करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान और सड़क सुरक्षा के लिए भी प्रभावी कदम उठाए जाएं।
अब देखना यह है कि प्रशासन इस ज्वलंत और संवेदनशील मुद्दे पर कब तक मौन साधे रहता है, या फिर आमजन की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ठोस कार्रवाई करता है।









