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दुद्धी के राजनीति के स्तंभ रहे विजय सिंह गोंड का निधन

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दुद्धी के राजनीति के स्तंभ रहे विजय सिंह गोंड का निधन

दुद्धी (सोनभद्र) दुद्धी विधानसभा क्षेत्र के लिए राजनीति सिर्फ सत्ता नहीं बल्कि सेवा का पर्याय बनाने वाले वरिष्ठ नेता विजय सिंह गोंड का निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गांव-गांव में मातमी सन्नाटा है और हर वर्ग के लोग उन्हें नम आंखों से याद कर रहे हैं।

विजय सिंह गोंड ने लगातार 8 बार विधायक बनकर दुद्धी विधानसभा का प्रतिनिधित्व किया और एक ऐसा राजनीतिक इतिहास रचा, जिसे आज भी लोग मिसाल के तौर पर देखते हैं। वे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की आवाज़, गरीबों के मसीहा और ज़मीनी राजनीति के मजबूत स्तंभ थे।जनता के दिलों में बसते थे ‘विजय बाबू’

क्षेत्र में लोग उन्हें प्यार से ‘विजय बाबू’ कहकर पुकारते थे। उनकी सादगी, मिलनसार स्वभाव और हर दुख-सुख में जनता के साथ खड़े रहने की आदत ने उन्हें जन-जन का नेता बना दिया था। चाहे सड़क हो, बिजली, पानी, शिक्षा या आदिवासी अधिकारों का मुद्दा विजय सिंह गोंड हमेशा आगे खड़े दिखाई देते थे।

विजय सिंह गोंड ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में आदिवासी समाज के हक़ और सम्मान के लिए संघर्ष किया। विधानसभा से लेकर सड़क तक उन्होंने कभी अपने समाज की आवाज़ को कमजोर नहीं पड़ने दिया। यही कारण है कि आज उनके निधन पर सिर्फ दुद्धी ही नहीं, बल्कि आसपास के पूरे अंचल में शोक का माहौल है।

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक संगठनों और हजारों समर्थकों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। सभी ने उन्हें एक ईमानदार, संघर्षशील और जनप्रिय नेता के रूप में याद किया।

विजय सिंह गोंड का जाना दुद्धी की राजनीति में एक ऐसे युग का अंत है, जिसकी भरपाई करना आसान नहीं होगा। उनके विचार, संघर्ष और जनता के प्रति समर्पण हमेशा आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।

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