वाराणसी। मंडलायुक्त के स्पष्ट आदेशों के बावजूद चांदपुर से मंडुवाडीह तक जाने वाली मुख्य सड़क पर अतिक्रमण का संकट लगातार गहराता जा रहा है। करीब 90 फीट चौड़ी इस सड़क पर अतिक्रमण के चलते अब महज 20 से 22 फीट जगह ही यातायात के लिए बची है, जिससे आए दिन जाम और दुर्घटनाओं की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम का पर्वतन दल वर्ष में तीन बार औपचारिक कार्रवाई करते हुए कोरम पूरा करता है। इस दौरान अतिक्रमणकारियों से जुर्माना वसूला जाता है, लेकिन स्थायी रूप से अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता। नतीजतन, दुकानदारों द्वारा सड़क और पीडब्ल्यूडी की भूमि पर किया गया कब्जा जस का तस बना हुआ है। चांदपुर–मंडुवाडीह मार्ग भदोही और प्रयागराज (इलाहाबाद) से जुड़ा हुआ है। इस मार्ग से बनारस स्टेशन, काशी विश्वनाथ मंदिर, विश्वविद्यालय और प्रमुख अस्पतालों तक पहुंच होती है, जिससे प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्रियों और स्थानीय लोगों का आवागमन रहता है। शादी-विवाह जैसे आयोजनों के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, जब सड़क पर घंटों जाम लग जाता है। स्थानीय अभिभावकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता है। संकरी हो चुकी सड़क पर चारपहिया वाहनों, दोपहिया वाहनों और पैदल राहगीरों के बीच टकराव की आशंका बनी रहती है। लोगों का कहना है कि छोटे-छोटे बच्चों के स्कूल आने-जाने के दौरान हमेशा डर बना रहता है।इसके अलावा शिवदासपुर से चांदपुर जाने वाली सड़क पर स्थित कुछ रबर कंपनियों द्वारा खुलेआम कोयला जलाया जा रहा है। ढाई से तीन कुंतल तक कोयला जलने से आसपास के इलाकों में धुआं फैल रहा है, जिससे लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या पर स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के अधिकारी आंख मूंदे हुए हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर शासन-प्रशासन कब तक केवल औपचारिक कार्रवाई करता रहेगा। क्षेत्रीय नागरिकों की मांग है कि अतिक्रमण को पूरी तरह हटाया जाए और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुगम आवागमन मिल सके।









