जौनपुर। वाराणसी स्थित धर्मेश्वर महादेव मंदिर के महंत एवं सुप्रसिद्ध भागवत कथा वक्ता आचार्य शिव प्रकाश जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण का व्यक्तित्व जितना विराट है, उतना ही अनूठा और रहस्यमय भी। उन्हें शब्दों में बांध पाना उतना ही कठिन है, जितना समुद्र की लहरों को बाहों में समेट लेना। श्रीकृष्ण अतीत में हुए, लेकिन उनका व्यक्तित्व भविष्य का है। मनुष्य आज भी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है, जहां वह श्रीकृष्ण के विराट स्वरूप को पूरी तरह समझ सके।
उन्होंने यह विचार जौनपुर जिले के ग्राम बनेवरा डीह में 21 सितंबर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान व्यक्त किए। कथा का आयोजन राहुल सिंह द्वारा कराया जा रहा है। कथा का समापन 27 सितंबर को पूर्णाहुति के साथ होगा।
आचार्य शिव प्रकाश जी महाराज ने कहा कि श्रीकृष्ण को किसी एक परिभाषा में बांधना संभव नहीं है। वे मनुष्य हैं, देवता हैं, प्रेम के प्रतीक हैं, योगी हैं, संत हैं, योद्धा हैं और साथ ही संन्यास की चेतना को भी धारण करते हैं। वे संसार में रहते हुए भी उससे निर्लिप्त रहने का संदेश देते हैं। यही उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता है।

उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण के जीवन और दर्शन पर हजारों ग्रंथ लिखे गए और असंख्य व्याख्याएं हुईं, लेकिन उनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व की गहराई को शब्दों में पूरी तरह समेट पाना संभव नहीं हुआ। श्रीकृष्ण को केवल पढ़ने और सुनने से नहीं, बल्कि उनके संदेश को जीवन में उतारकर और अंतर्मन से महसूस करके समझा जा सकता है।
कथा के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं से भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने, कर्म के प्रति निष्ठावान रहने और प्रेम, करुणा तथा भक्ति के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। कथा स्थल पर श्रद्धालु श्रीकृष्ण की भक्ति में भावविभोर नजर आए।










