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44वें दीक्षांत महोत्सव में सजी लोक-संस्कृति की रंगारंग छटा, मेधावी छात्र-छात्राएं सम्मानित

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वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के 44वें दीक्षांत महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में लोक-नृत्य प्रतियोगिता एवं पुरस्कार वितरण समारोह का भव्य आयोजन किया गया। माननीया कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देश, कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा के संरक्षण तथा कुलसचिव राकेश कुमार (आईएएस) की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में लोक-संस्कृति के संरक्षण के साथ विभिन्न प्रतियोगिताओं के मेधावी प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलसचिव राकेश कुमार (आईएएस) ने कहा कि भारतीय लोक-संस्कृति राष्ट्र की आत्मा है और प्रतिभाओं का सम्मान ही उत्कृष्टता की सबसे बड़ी प्रेरणा बनता है। उन्होंने कहा कि लोक-नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय परंपराओं, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता के सशक्त वाहक हैं। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ सांस्कृतिक, साहित्यिक और नैतिक मूल्यों से भी समृद्ध बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है।

कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने विजेता छात्र-छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत महोत्सव केवल उपाधि वितरण का अवसर नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बहुआयामी प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने का उत्सव है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति और लोक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन में युवाओं की सक्रिय भागीदारी समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चन्द्रा ने कहा कि दीक्षांत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित शैक्षणिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, कलात्मक एवं खेलकूद प्रतियोगिताओं का उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास करना है। उन्होंने प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए भविष्य में भी सक्रिय सहभागिता का आह्वान किया।

लोक-नृत्य प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए देश की विविध लोक परंपराओं को मंच पर सजीव कर दिया। रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और पूरा परिसर भारतीय संस्कृति के रंगों से सराबोर हो उठा।

इस अवसर पर दीक्षांत महोत्सव की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रशस्ति-पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। निबंध लेखन में अंकित निषाद प्रथम, ओम तिवारी द्वितीय एवं शिवम कुमार पाण्डेय तृतीय रहे। चित्रकला प्रतियोगिता में दीपांजलि राय प्रथम, दीक्षा कुमारी द्वितीय तथा प्रियांजली राय तृतीय स्थान पर रहीं। भाषण प्रतियोगिता में विपुल पाण्डेय प्रथम एवं वर्षा द्वितीय, जबकि काव्य लेखन में आनंद कुमार झा प्रथम और शौर्या सिंह द्वितीय स्थान पर रहे। पुस्तक वाचन प्रतियोगिता में रिद्धि तिवारी प्रथम, सृष्टि उपाध्याय द्वितीय तथा राधिका गौतम तृतीय रहीं। तीरंदाजी प्रतियोगिता में निहाल, अंकित एवं महेश विजेता तथा अक्षत, सर्वेश एवं वर्षा उपविजेता रहे। वहीं समूह लोक-नृत्य में सौम्या, अंजलि, मातंगी, साक्षी, प्रियांजलि एवं दीपांजलि की टीम ने उत्कृष्ट प्रस्तुति देकर विशेष सराहना प्राप्त की।

कार्यक्रम का सहसंयोजन डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव एवं डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने किया। अंत में आयोजन समिति की ओर से सभी अतिथियों, निर्णायकों, शिक्षकों, प्रतिभागियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। समारोह में विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

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