वाराणसी, 9 जुलाई। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में 44वें दीक्षान्त महोत्सव की श्रृंखला के अंतर्गत गुरुवार को योग साधना केन्द्र में चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों एवं संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए भारतीय संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक सरोकारों पर आधारित आकर्षक चित्रों के माध्यम से अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि चित्रकला केवल रंगों का संयोजन नहीं, बल्कि कल्पनाशक्ति, संवेदनशीलता और सृजनात्मकता की सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रतियोगिताएँ विद्यार्थियों में सौन्दर्यबोध, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करती हैं। शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी साहित्यिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को निरंतर प्रोत्साहित करता रहेगा।
कार्यक्रम की समन्वयक प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा ने कहा कि चित्रकला विद्यार्थियों की मौलिक सोच और रचनात्मक अभिव्यक्ति का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि 44वें दीक्षान्त महोत्सव के अंतर्गत आयोजित विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों के बहुआयामी व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों में सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
प्रतियोगिता का सफल संयोजन डॉ. रविशंकर पाण्डेय, डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव एवं डॉ. ज्ञानेन्द्र सापकोटा ने किया। समापन अवसर पर डॉ. रविशंकर पाण्डेय और डॉ. सत्येन्द्र कुमार यादव ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, प्रतिभागियों एवं आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर डॉ. नितिन आर्य, डॉ. सुमीता, डॉ. पासांग, डॉ. अर्पिता सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।











