वाराणसी। रविदास स्मारक सोसाइटी के तत्वावधान में पूर्व उपप्रधानमंत्री एवं प्रख्यात समाज सुधारक बाबू जगजीवन राम की 40वीं पुण्यतिथि सोमवार को श्री संत गुरु रविदास मंदिर, राजघाट में श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उपस्थित लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा समता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को स्मरण करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए आचार्य डॉ. भारत भूषण ने कहा कि बाबू जगजीवन राम सर्वहारा वर्ग के सच्चे हितैषी थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, सामाजिक समानता और समतामूलक समाज की स्थापना के लिए समर्पित किया। उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करते हैं।
रविदास स्मारक सोसाइटी के प्रबंधक मदन लाल भगत ने कहा कि बाबू जगजीवन राम गरीबों, मजदूरों और किसानों के सच्चे मसीहा थे। उनकी सोच वैज्ञानिक, प्रगतिशील और सर्वधर्म समभाव पर आधारित थी। उन्होंने संत गुरु रविदास के समतावादी विचारों को आत्मसात कर सामाजिक सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया।

साहित्यकार डॉ. जयशंकर जय ने कहा कि बाबू जगजीवन राम आधुनिक भारत के उन महान नेताओं में रहे, जिन्होंने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है।
सभा में वक्ताओं ने बाबू जगजीवन राम की राष्ट्रसेवा एवं समाजोत्थान में उनके अतुलनीय योगदान का उल्लेख करते हुए उन्हें मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने की मांग भी उठाई।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन वीरेन्द्र सिंह बबलू ने किया। इस अवसर पर पुजारी रामविलास दास, रामेश्वर दास, वकुलिया बाबा, धर्मराज राम, मदन यादव, चंदन शर्मा, नीरज माली, रमेश गुप्ता, दुर्गा मांझी, हारुन मोहन चक्रवर्ती, अर्पित पाण्डेय, मोहित राय सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।










