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गंगा तट पर गूंजे सम्पूर्णानन्द के सुर, ‘सुबह-ए-बनारस’ बना शास्त्रीय संगीत की साधना का ऐतिहासिक मंच

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वाराणसी। काशी की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत के प्रतीक विश्वप्रसिद्ध ‘सुबह-ए-बनारस’ के मंच पर रविवार का प्रभात भारतीय शास्त्रीय संगीत की मधुर स्वरलहरियों से आलोकित हो उठा। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने अपनी सधी हुई, भावपूर्ण और शास्त्रीय प्रस्तुतियों से ऐसा सांगीतिक वातावरण रचा कि अस्सी घाट पर उपस्थित श्रोता देर तक सुर, साधना और भक्ति के अद्भुत संगम में डूबे रहे। कार्यक्रम ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि काशी की संगीत परंपरा आज भी नई पीढ़ी के माध्यम से पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ रही है।

संगीत विभाग की सहायक आचार्य डॉ. श्रुति उपाध्याय के निर्देशन में मानस तिवारी, अश्वनी शुक्ला, मुलायम सिंह यादव एवं गौरांश उपाध्याय ने क्रमवार अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। कार्यक्रम का शुभारम्भ राग भैरव की प्रसिद्ध बंदिश “जागो मोहन प्यारे” से हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने आलाप, तान और राग की गंभीरता का अत्यंत संतुलित एवं प्रभावशाली निर्वहन किया। इसके बाद राग कालिंगड़ा में भजन “कोई कहियो रे प्रभु आवन की” तथा निर्गुण “रे मनवा रे! जीवन एक संग्राम” की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्ति, आध्यात्मिकता और भारतीय सांगीतिक परंपरा के रंग में रंग दिया। श्रोताओं ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए उनकी प्रस्तुतियों की मुक्तकंठ से सराहना की।

गायन को तबले पर प्रशांत कुमार तथा हारमोनियम पर प्रवीण सिंह की उत्कृष्ट संगत ने नई ऊँचाइयाँ प्रदान कीं। दोनों कलाकारों की सधी हुई संगति ने प्रस्तुतियों की गरिमा और प्रभाव को और अधिक सशक्त बनाया।

यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष रही क्योंकि डॉ. श्रुति उपाध्याय के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने इससे पूर्व काशी सांसद सांस्कृतिक महोत्सव में जनपद स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ाया था। संगीत विभाग निरंतर अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के माध्यम से विश्वविद्यालय की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ कर रहा है।

इस अवसर पर डॉ. श्रुति उपाध्याय ने कहा कि “विद्यार्थी किसी भी शैक्षणिक संस्था की वास्तविक शक्ति और आधारस्तम्भ होते हैं। विश्वविद्यालय में प्रतिभाओं का अभाव नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने, संवर्धित करने और उचित मंच प्रदान करने की है। अपने विद्यार्थियों को निरंतर प्रगति करते देखना किसी भी गुरु के लिए सबसे बड़ा संतोष और गर्व का विषय होता है।”

कार्यक्रम के समापन पर ‘सुबह-ए-बनारस’ की ओर से सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति, गुरुजनों एवं संगीत विभाग ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सभी विद्यार्थियों को शुभकामनाएँ दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

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