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भारतीय सीमेंट उद्योग की शताब्दी यात्रा पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण, 80 से अधिक ब्रांडों के उत्थान-पतन का विस्तृत विश्लेषण

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नोएडा। भारतीय सीमेंट उद्योग के इतिहास, विकास, ब्रांड निर्माण और भविष्य की संभावनाओं पर केंद्रित वरिष्ठ उद्योग विशेषज्ञ एवं लेखक डॉ. के. एन. झा की पुस्तक “भारत में सीमेंट ब्रांडों की एबीसी : अतीत, वर्तमान और भविष्य” का भव्य लोकार्पण नोएडा में आयोजित एक गरिमामय समारोह में किया गया। पुस्तक का विमोचन मंजू देवी कनोडिया, विशाल कनोडिया तथा गौतम कनोडिया (कनोडिया समूह के संस्थापक) द्वारा किया गया। समारोह में भारतीय सीमेंट उद्योग के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय सीमेंट एवं भवन निर्माण सामग्री परिषद (एनसीबी) के पूर्व महानिदेशक डॉ. के. मोहन तथा प्रसिद्ध तकनीकी-विधिक सलाहकार एवं कॉर्पोरेट सलाहकार विजय सरदाना विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

इस अवसर पर वक्ताओं ने पुस्तक को भारतीय सीमेंट उद्योग के विकास, ब्रांड निर्माण और बाजार की बदलती प्रवृत्तियों को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया। डॉ. के. मोहन ने कहा कि भारत का सीमेंट उद्योग देश की आर्थिक प्रगति और आधारभूत संरचना निर्माण के साथ निरंतर विकसित होता रहा है। आज भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक देश है। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार, गुणवत्ता सुधार, पर्यावरणीय स्थिरता तथा प्रभावी ब्रांड निर्माण ने इस उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। उनके अनुसार डॉ. झा की यह पुस्तक सीमेंट उद्योग की विकास गाथा को ब्रांडों के दृष्टिकोण से प्रस्तुत करने वाला एक महत्वपूर्ण और शोधपरक प्रयास है।

विजय सरदाना ने कहा कि यह पुस्तक उद्योग जगत के पेशेवरों, निवेशकों, नीति-निर्माताओं, शोधार्थियों, सलाहकारों तथा विद्यार्थियों के लिए एक उपयोगी संदर्भ ग्रंथ सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि पुस्तक में विस्तार से बताया गया है कि किसी ब्रांड का निर्माण किस प्रकार होता है, वह समय के साथ कैसे विकसित होता है, बदलती परिस्थितियों में स्वयं को कैसे पुनर्स्थापित करता है और प्रतिस्पर्धा के दौर में किन कारणों से कुछ ब्रांड बाजार से गायब हो जाते हैं।

लेखक डॉ. के. एन. झा ने पुस्तक की विषय-वस्तु पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इसमें वर्ष 1914 से लेकर वर्तमान समय तक भारतीय सीमेंट उद्योग की विकास यात्रा का क्रमबद्ध एवं विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया है। पुस्तक में उन 80 से अधिक सीमेंट ब्रांडों का विश्लेषण भी शामिल है, जो कभी बाजार में स्थापित रहे लेकिन समय के साथ विलुप्त हो गए। इसके अलावा उन उद्योगपतियों और प्रवर्तकों के योगदान को भी रेखांकित किया गया है, जिन्होंने अपने ब्रांडों को चार दशकों से अधिक समय तक सफलतापूर्वक प्रासंगिक बनाए रखा।

उन्होंने बताया कि पुस्तक में बहुराष्ट्रीय कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा उभरते निजी क्षेत्र के सीमेंट ब्रांडों की यात्रा, उपलब्धियों और चुनौतियों का भी विस्तृत अध्ययन किया गया है। पुस्तक का अंतिम अध्याय भारतीय सीमेंट उद्योग के भविष्य, नवाचार, हरित प्रौद्योगिकी, ऊर्जा दक्षता तथा सतत विकास की संभावनाओं पर केंद्रित है, जो आने वाले वर्षों में उद्योग की दिशा और दशा को समझने में सहायक होगा।

समारोह में सीमेंट उद्योग से जुड़े अनेक वरिष्ठ पेशेवरों, अधिकारियों एवं विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस अवसर पर बाबूलाल सिंह, आशुतोष शुक्ला तथा आर. एन. मालू सहित उद्योग जगत की अनेक प्रमुख हस्तियां उपस्थित रहीं।

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