वाराणसी, 16 जून। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षिक गतिविधियों, आधारभूत विकास कार्यों तथा संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण-संवर्धन को लेकर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविन्द्र जायसवाल और विश्वविद्यालय के श्रमण विद्या संकायाध्यक्ष प्रो. रमेश प्रसाद के बीच विस्तृत एवं सार्थक विचार-विमर्श हुआ। बैठक में विश्वविद्यालय के वर्तमान शैक्षिक परिदृश्य, भावी योजनाओं तथा वैश्विक स्तर पर संस्कृत के प्रचार-प्रसार को लेकर कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।
इस अवसर पर मंत्री रविन्द्र जायसवाल ने कहा कि सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी संस्कृत भाषा और भारतीय ज्ञान परम्परा का परचम फहरा रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय के ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र द्वारा ज्योतिष, वास्तुशास्त्र, कर्मकाण्ड, योग, संस्कृत संभाषण एवं पालि जैसे विषयों में देश-विदेश के हजारों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिए जाने की सराहना करते हुए इसे संस्कृत के वैश्विक विस्तार की दिशा में एक उल्लेखनीय पहल बताया।
मंत्री ने विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में घटती छात्र संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि समय की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक संसाधनों तथा प्रभावी जनसंपर्क के माध्यम से विद्यार्थियों को संस्कृत अध्ययन की ओर आकर्षित करने के लिए विशेष प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने छात्र हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए शैक्षिक गुणवत्ता को और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया।

बैठक के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों, आधारभूत सुविधाओं के विकास तथा भविष्य की विकास योजनाओं की भी समीक्षा की गई। साथ ही संस्कृत भाषा, भारतीय संस्कृति और प्राचीन ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं संवर्धन में विश्वविद्यालय की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने के विभिन्न पहलुओं पर गंभीरतापूर्वक चर्चा हुई।
कार्यक्रम विश्वविद्यालय में शैक्षिक अवकाश तथा मंत्री के समय की अनुकूलता को ध्यान में रखते हुए प्रो. रमेश प्रसाद के आवास पर आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ बौद्ध दर्शन विभाग के अतिथि अध्यापक डॉ. लेखमणि त्रिपाठी द्वारा स्वस्तिक वाचन के साथ हुआ। इसके उपरांत प्रो. रमेश प्रसाद ने राज्य मंत्री रविन्द्र जायसवाल का अंगवस्त्र एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया।









