वाराणसी। अखिल भारतीय सनातन न्यास, जैतपुरा द्वारा आयोजित रामकथा के षष्ठम दिवस पर श्रद्धा, भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। कथा व्यास पातालपुरी पीठाधीश्वर संत जगतगुरु बालक देवाचार्य महाराज ने सीता स्वयंवर और राम-बारात प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
उन्होंने कहा कि जनकपुर में आयोजित सीता स्वयंवर में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंजन के बाद महाराज जनक ने मुनि विश्वामित्र की आज्ञा से अयोध्या में चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ को दूत भेजकर बारात सहित मिथिला आने का निमंत्रण दिया। यह शुभ समाचार सुनकर अयोध्या में हर्ष की लहर दौड़ गई। गुरु वशिष्ठ की आज्ञा प्राप्त कर महाराज दशरथ चारों राजकुमारों और नगरवासियों के साथ भव्य बारात लेकर जनकपुर के लिए प्रस्थान किए।
कथा के दौरान बालक देवाचार्य महाराज ने बताया कि मिथिला पहुंचने पर महाराज जनक ने अत्यंत श्रद्धा और आदर के साथ बारात का स्वागत किया। दही-चूड़ा सहित विविध व्यंजनों से सत्कार कर गुरु वशिष्ठ एवं महाराज दशरथ का सम्मान किया गया। इसके उपरांत भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों का विवाह संपन्न हुआ और सभी आनंदपूर्वक अपनी-अपनी अर्धांगिनी के साथ अयोध्या लौटे।

रामकथा में उपस्थित श्रद्धालु विवाह प्रसंग के भावपूर्ण वर्णन पर भक्ति रस में सराबोर हो उठे। कथा पंडाल में जय श्रीराम के उद्घोष लगातार गूंजते रहे।
कार्यक्रम के दौरान विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने व्यासपीठ की आरती उतारकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर संदीप चतुर्वेदी, आलोक चंद्र शुक्ला, डॉ. अजय जायसवाल, जयशंकर गुप्ता, प्रमोद यादव ‘मुन्ना’, ज्ञानचंद मौर्य, विष्णु गुप्ता, भुवाल जी एडवोकेट, डॉ. अलका जायसवाल, अर्चना गुप्ता, असीम बाबू, राधा गुप्ता एवं दीप्ति तिवारी सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। मंच संचालन प्रधान सचिव राजेश सेठ ने किया।









