नई दिल्ली। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ी अनिश्चितताओं के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए वेनेजुएला से कच्चे तेल के आयात में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। ताजा आंकड़ों के अनुसार वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता देश बनकर उभरा है, जबकि सऊदी अरब और अमेरिका जैसे पारंपरिक सप्लायर पीछे छूट गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक मई महीने में भारत को वेनेजुएला से होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई अप्रैल की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ गई है। वर्तमान समय में केवल रूस और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ही भारत को वेनेजुएला से अधिक तेल की आपूर्ति कर रहे हैं।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज मार्ग पर संभावित जोखिमों ने भारतीय कंपनियों को वैकल्पिक स्रोतों की ओर तेजी से बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। इसी रणनीति के तहत सरकारी और निजी रिफाइनरी कंपनियों ने वेनेजुएला से तेल खरीद बढ़ाई है।

विशेषज्ञों के अनुसार वेनेजुएला का कच्चा तेल अपेक्षाकृत सस्ता पड़ रहा है, जिससे भारतीय रिफाइनरियों को लागत नियंत्रण में मदद मिल रही है। इसके अलावा अमेरिका द्वारा कुछ प्रतिबंधों में दी गई राहत के बाद वेनेजुएला के तेल निर्यात में भी तेजी आई है, जिसका लाभ भारत सहित कई एशियाई देशों को मिल रहा है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल है और अपनी कुल जरूरतों का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में अस्थिरता के दौर में भारत लगातार अपनी ऊर्जा आपूर्ति को विविध बनाने की नीति पर काम कर रहा है। वेनेजुएला से बढ़ती खरीद इसी रणनीतिक नीति का हिस्सा मानी जा रही है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक बना रहता है तो भारत भविष्य में भी रूस, UAE और वेनेजुएला जैसे देशों से आयात बढ़ा सकता है, ताकि घरेलू बाजार में ईंधन आपूर्ति और कीमतों को संतुलित रखा जा सके।









