वाराणसी, 1 जुलाई। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या विभाग की ओर से योगसाधना केन्द्र में धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के कालजयी ग्रंथ ‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ की समकालीन प्रासंगिकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं व्याख्यान-विमर्श का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभर से आए विद्वानों, शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भारतीय एवं पाश्चात्य राजनीतिक दर्शन के परिप्रेक्ष्य में स्वामी करपात्री जी के वैचारिक अवदान पर गंभीर मंथन किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि ‘मार्क्सवाद और रामराज्य’ भारतीय राजनीतिक दर्शन की अनुपम कृति है। यह ग्रंथ केवल मार्क्सवादी विचारधारा की समीक्षा नहीं, बल्कि भारतीय राज्य-दर्शन, सामाजिक समरसता, आर्थिक न्याय और धर्माधारित लोकव्यवस्था का प्रामाणिक प्रतिपादन भी करता है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम न्याय, मर्यादा, कर्तव्य और लोककल्याण के आदर्श हैं तथा रामराज्य आज भी सुशासन की सर्वोत्तम अवधारणा है।
मुख्य अतिथि स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी ने कहा कि स्वामी करपात्री जी का चिंतन राष्ट्र और धर्म का शाश्वत पथप्रदर्शक है। उनका साहित्य भारतीय सनातन ज्ञान परंपरा का जीवंत स्वरूप प्रस्तुत करता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय मनीषियों के मूल ग्रंथों का अध्ययन कर राष्ट्र और संस्कृति के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान किया।

मुख्य वक्ता एवं युवा चेतना के राष्ट्रीय संयोजक रोहित कुमार सिंह ने कहा कि स्वामी करपात्री जी ने अपने ग्रंथ में मार्क्सवाद के आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक पक्षों का भारतीय दृष्टिकोण से गहन विश्लेषण किया है। उन्होंने कहा कि रामराज्य न्याय, समरसता, नैतिक मूल्यों और लोककल्याण पर आधारित आदर्श समाज व्यवस्था है तथा वर्तमान समय में इसकी प्रासंगिकता और बढ़ गई है।
संगोष्ठी के संयोजक डॉ. रविशंकर पाण्डेय ने स्वागत भाषण एवं विषय-प्रवर्तन करते हुए कहा कि यह आयोजन भारतीय ज्ञान-परंपरा के पुनर्पाठ और युवा पीढ़ी में राष्ट्रकेंद्रित वैचारिक चेतना के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंगलाचरण, दीप प्रज्ज्वलन तथा मां सरस्वती एवं स्वामी करपात्री जी के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। कुलपति ने अतिथियों का पारंपरिक स्वागत एवं अभिनंदन किया। अंत में सामूहिक राष्ट्रगान के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।
इस अवसर पर कुलानुशासक प्रो. जितेन्द्र कुमार, छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. शैलेश कुमार मिश्र, प्रो. राजनाथ, प्रो. विद्या कुमारी चंद्रा, डॉ. विजय कुमार शर्मा, डॉ. जितेन्द्र धर द्विवेदी सहित विश्वविद्यालय के अनेक आचार्य, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।










