नई दिल्ली। भारतीय सेना ने अग्निपथ योजना के तहत भर्ती अग्निवीरों के स्थायीकरण (परमानेंट कैडर) की प्रक्रिया को लेकर एक अहम और स्पष्ट निर्णय लिया है। सेना ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जो अग्निवीर भविष्य में स्थायी सैनिक बनना चाहते हैं, वे परमानेंट नियुक्ति मिलने तक विवाह नहीं कर सकेंगे। इस अवधि के दौरान यदि कोई अग्निवीर शादी करता है, तो उसे स्थायी सेवा के लिए अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। सेना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थायीकरण की प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक अग्निवीरों को चयन प्रक्रिया पूरी होने तक अविवाहित रहना अनिवार्य होगा। यदि कोई अग्निवीर स्थायी सैनिक बनने से पहले या चयन प्रक्रिया के दौरान विवाह करता है, तो वह न केवल स्थायी नियुक्ति के लिए आवेदन करने से वंचित रहेगा, बल्कि चयन प्रक्रिया में शामिल होने का अधिकार भी खो देगा। भारतीय सेना का कहना है कि यह फैसला अनुशासन, प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सेवा के प्रति पूर्ण प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। प्रारंभिक सेवा अवधि में अग्निवीरों को कठोर सैन्य प्रशिक्षण, फील्ड ड्यूटी और मानसिक-शारीरिक दक्षता पर पूरा ध्यान देना होता है। ऐसे में पारिवारिक जिम्मेदारियां उनकी कार्यक्षमता और प्रशिक्षण पर असर डाल सकती हैं। सेना के अधिकारियों के मुताबिक, स्थायीकरण के लिए चुने जाने वाले अग्निवीरों से उच्च स्तर की अनुशासनप्रियता, समर्पण और उपलब्धता की अपेक्षा की जाती है। इसी उद्देश्य से यह नियम लागू किया गया है, ताकि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, सुव्यवस्थित और पूरी तरह पेशेवर बनी रहे। इस निर्णय के बाद अग्निपथ योजना के तहत सेवा कर रहे हजारों युवाओं को अपने भविष्य से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने होंगे। खासतौर पर विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय को स्थायी नियुक्ति मिलने तक टालना अब अनिवार्य शर्त बन गया है। सेना के इस कदम को अग्निवीर योजना के तहत स्थायीकरण की प्रक्रिया को और अधिक अनुशासित व प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है।









