महराजगंज (आजमगढ़)। थाना क्षेत्र के चक कलवारिया गांव में एक सौ वर्ष पुराने पुश्तैनी मकान को लेकर भूमि विवाद गहराता जा रहा है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसके पट्टीदार पक्ष के लोग विवादित भूमि पर रात के अंधेरे में मिट्टी पाटकर अवैध कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। विरोध करने पर गाली-गलौज, मारपीट और जान-माल की धमकी दी जा रही है। मामले को लेकर पीड़िता ने थाना महराजगंज में लिखित शिकायत देकर न्याय की गुहार लगाई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार गांव चक कलंदरिया निवासी महिला ने पुलिस को दिए गए प्रार्थना पत्र में बताया है कि उसका मकान लगभग सौ वर्ष पुराना है। मकान की खिड़की के सामने स्थित भूमि को लेकर पूर्व से विवाद चला आ रहा है। इस भूमि के संबंध में न्यायालय में वाद भी विचाराधीन रहा है। पीड़िता का कहना है कि उक्त भूमि उसके मकान से जुड़ी हुई है और वहां किसी प्रकार का निर्माण अथवा मिट्टी भराव होने से पुराने मकान को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।
महिला के अनुसार पट्टीदार पक्ष के कुछ लोग संगठित होकर रात के समय चोरी-छिपे भूमि पर मिट्टी पाटने का कार्य कर रहे हैं। इससे न केवल मकान की संरचना प्रभावित होगी बल्कि बरसात के मौसम में जल निकासी की समस्या भी उत्पन्न हो सकती है। पीड़िता ने आशंका जताई है कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो वर्षों पुराना मकान खतरे में पड़ सकता है।

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि जब उसने इस कार्य का विरोध किया तो संबंधित लोगों ने अभद्र भाषा का प्रयोग किया और मारपीट पर उतारू हो गए। इतना ही नहीं, भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने और जान-माल की हानि पहुंचाने की धमकी भी दी गई। घटना से परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में भूमि विवाद अक्सर बड़े संघर्ष का रूप ले लेते हैं। ऐसे मामलों में समय रहते प्रशासनिक हस्तक्षेप आवश्यक होता है ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो और किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
पीड़िता ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि विवादित भूमि पर तत्काल यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए जाएं, अवैध मिट्टी भराव के कार्य को रोका जाए तथा धमकी देने वाले लोगों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। मामले की शिकायत थाना महराजगंज में दर्ज कराई गई है, जिसके बाद स्थानीय पुलिस द्वारा प्रकरण की जांच किए जाने की संभावना है।
भूमि विवाद से जुड़े इस मामले ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। अब निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि सौ वर्ष पुराने मकान को लेकर उठे इस विवाद का समाधान किस प्रकार किया जाता है।









