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साहित्य, सेवा और संघर्ष की विरासत: सावित्रीबाई फुले की जयंती पर ज्ञान की रोशनी से रोशन हुए नन्हे भविष्य

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वाराणसी। भारत की प्रथम महिला शिक्षिका, समाज सुधार की अग्रदूत और नारी चेतना की अमर प्रतीक माता सावित्रीबाई फुले की जयंती के पावन अवसर पर चंद्रा साहित्य परिषद ट्रस्ट ने शिक्षा और सामाजिक सरोकार का प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया। इंदिरा नगर, चितईपुर स्थित परिषद कार्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के दर्जनों स्कूली बच्चों के बीच पठन-पाठन सामग्री का वितरण कर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनाने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ माता सावित्रीबाई फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। मुख्य अतिथि एनटीपीसी के पूर्व अपर महाप्रबंधक एवं चंद्रा साहित्य परिषद ट्रस्ट के राष्ट्रीय सलाहकार इंजीनियर सी.एल. विश्वकर्मा तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. कैलाश सिंह विकास ने सावित्रीबाई फुले के ऐतिहासिक योगदान को याद करते हुए कहा कि शिक्षा ही सामाजिक समानता, आत्मसम्मान और राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है। उन्होंने परिषद द्वारा निरंतर किए जा रहे जनहितकारी कार्यों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ ने बताया कि माता सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर कई दर्जन गरीब बच्चों को कॉपी, पेंसिल, रबर, रूल कटर, ज्ञानवर्धक पुस्तकें तथा खाद्य सामग्री वितरित की गई। उन्होंने कहा कि चंद्रा साहित्य परिषद ट्रस्ट सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है और इससे पूर्व भी कंबल, गर्म कपड़े, दवाइयों सहित अन्य आवश्यक सामग्री का वितरण किया जा चुका है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार आनंद सिंह ‘अन्ना’ ने अपने संबोधन में कहा कि माता सावित्रीबाई फुले केवल शिक्षा की जननी ही नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना की वह मशाल हैं, जिनकी रोशनी आज भी समाज को नई दिशा दे रही है। उन्होंने कहा कि जिस दौर में बेटियों को पढ़ाना अपराध समझा जाता था, उस समय सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को हथियार बनाकर सामाजिक कुरीतियों पर निर्णायक प्रहार किया। आनंद सिंह ‘अन्ना’ ने चंद्रा साहित्य परिषद ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि गरीब और वंचित बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का यह अभियान सावित्रीबाई फुले के विचारों को सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि किताब, कलम और संस्कार ही समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं, और ऐसे आयोजन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने प्रत्येक बच्चे का माल्यार्पण कर स्नेहपूर्वक कापियाँ, पेंसिल, रबर, ज्ञानवर्धक पुस्तकें तथा नमकीन-बिस्किट वितरित किए। बच्चों के चेहरों पर शिक्षा की नई उम्मीद और आत्मविश्वास की झलक साफ दिखाई दी। इस अवसर पर चंद्रसेन भारतीय, शिक्षिका शालिनी सिन्हा, बिभूति भूषण कुमार सहित अनेक गणमान्य नागरिक, समाजसेवी एवं स्थानीय लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजीनियर राम नरेश ‘नरेश’ ने किया।सावित्रीबाई फुले की स्मृति में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल शिक्षा के प्रति सामाजिक दायित्व का सशक्त संदेश बनकर उभरा, बल्कि यह भी प्रमाणित किया कि जब साहित्य, सेवा और संवेदना एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो समाज का हर वंचित वर्ग ज्ञान की मुख्यधारा से जुड़ सकता है।

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