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सहज योग से सशक्त मन–प्राण: संस्कृत विश्वविद्यालय में आत्मशांति का अनूठा संगम

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वाराणसी, 18 अप्रैल। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के मुख्य भवन में शनिवार अपराह्न आयोजित सहज योग प्रशिक्षण शिविर ने विद्यार्थियों को मानसिक शांति, आत्मिक संतुलन और जीवनोपयोगी अनुशासन का सशक्त संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे पूरा परिसर सकारात्मक ऊर्जा से ओत-प्रोत नजर आया।

शिविर में मुख्य वक्ता डॉ. पुष्पा उपाध्याय ने सहज योग के सिद्धांतों और उसके व्यावहारिक पक्षों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल शारीरिक क्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में योग को शामिल करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि नियमित अभ्यास से मानसिक एकाग्रता, आत्मविश्वास और आंतरिक शांति प्राप्त की जा सकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव और व्यस्तता के बीच सहज योग एक सरल, प्रभावी और वैज्ञानिक उपाय के रूप में उभर रहा है, जो व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाता है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान विद्यार्थियों को योगाभ्यास कराया गया, जिसमें उन्होंने इसके शारीरिक एवं आध्यात्मिक लाभों का प्रत्यक्ष अनुभव किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं आधुनिक ज्ञान-विज्ञान संकाय की संकायाध्यक्ष प्रो. विधु द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक युग में छात्र-छात्राएं मानसिक दबाव और असंतुलन का सामना कर रहे हैं। ऐसे में योग न केवल तनाव मुक्ति का मार्ग है, बल्कि यह बौद्धिक एवं आध्यात्मिक विकास की आधारशिला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर सकारात्मक और संतुलित जीवन शैली अपनाएं।

शिविर के दौरान उपस्थित विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए योग के माध्यम से आत्मविकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का वातावरण अनुशासन, ऊर्जा और प्रेरणा से परिपूर्ण रहा।

इस अवसर पर दीनदयाल उपाध्याय कौशल केन्द्र एवं शिक्षा शास्त्र विभाग के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ डॉ. जय प्रकाश, डॉ. शशि कुशवाहा, डॉ. गोपाल प्रसाद, डॉ. प्रियंबदा सहित अनेक शिक्षकगण मौजूद रहे।

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