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शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना से ही होगा सशक्त राष्ट्रनिर्माण: प्रो. बिहारी लाल शर्मा

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नई दिल्ली। महान किसान–मजदूर नेता एवं राष्ट्रचेतना के अग्रदूत स्वामी सहजानन्द सरस्वती की जयंती के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के सभागार में एक गरिमामय एवं भव्य समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विद्वानों, समाजसेवियों, शिक्षाविदों एवं जनप्रतिनिधियों ने सहभागिता कर स्वामी जी के योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

उद्घाटन सत्र में परम पूज्य स्वामी अभिषेक ब्रह्मचारी जी, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश माननीय बी. आर. गवई, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, केंद्रीय राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी निषाद तथा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने कहा कि स्वामी सहजानन्द सरस्वती का जीवन शिक्षा, संस्कार और सामाजिक चेतना के समन्वय का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने कहा कि स्वामी जी ने किसान और श्रमिक समाज को आत्मसम्मान, संगठन और संघर्ष की शक्ति प्रदान की। “राष्ट्रनिर्माण केवल आर्थिक विकास से संभव नहीं, बल्कि शिक्षा और नैतिक मूल्यों के संवर्धन से ही सशक्त समाज का निर्माण होता है,” उन्होंने कहा। प्रो. शर्मा ने युवाओं से स्वामी जी के आदर्शों को आत्मसात कर समाजसेवा और राष्ट्रीय दायित्वों के निर्वहन का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और उन्हें संगठित कर मुख्यधारा से जोड़ा। उन्होंने कहा कि किसान सशक्तिकरण ही आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है और स्वामी जी की विचारधारा आज भी ग्रामीण भारत के विकास के लिए प्रासंगिक मार्गदर्शन प्रदान करती है।

पूर्व मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई ने स्वामी जी के जीवन को संविधानिक मूल्यों, समानता और सामाजिक न्याय का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि न्याय, अधिकार और समान अवसर की भावना को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। उन्होंने युवाओं से संविधान के मूल सिद्धांतों के संरक्षण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने की अपील की।

केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. राजभूषण चौधरी निषाद ने अपने उद्बोधन में कहा कि स्वामी सहजानन्द सरस्वती ने वंचित, पिछड़े और किसान वर्ग को आवाज देने का ऐतिहासिक कार्य किया। उनका संघर्ष आज भी समाज के कमजोर वर्गों के लिए प्रेरणास्रोत है और समरस समाज की स्थापना की दिशा में मार्गदर्शक है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्य वक्ताओं ने स्वामी जी के संघर्षपूर्ण जीवन, किसान–मजदूर हितों के लिए उनके आंदोलनों तथा राष्ट्रनिर्माण में उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उपस्थित जनसमूह ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।

समारोह के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन के लिए आयोजक मंडल तथा ‘युवा चेतना’ के राष्ट्रीय संयोजक श्री रोहित सिंह के प्रयासों की सराहना की गई। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रनिर्माण की दिशा में स्वामी सहजानन्द सरस्वती के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया गया।

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