वाराणसी। क्षत्रिय धर्म संसद काशी के तत्वावधान में आयोजित शौर्य कथा कार्यक्रम में कथावाचक आचार्य शांतनु महाराज ने राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता का प्रखर संदेश देते हुए कहा कि राष्ट्र की रक्षा और उन्नति के लिए शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि जहां शस्त्र राष्ट्र की सुरक्षा का प्रतीक है, वहीं शास्त्र समाज को सही दिशा, नीति और संस्कार प्रदान करते हैं।
अपने उद्बोधन में उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि जन-जन में राष्ट्र के प्रति समर्पण और गौरव की भावना जागृत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन प्रसंगों का उदाहरण देते हुए बताया कि वनवास काल में उन्होंने राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग किया, लेकिन धर्म और शास्त्रों के मार्ग से कभी विचलित नहीं हुए। यही आदर्श आज भी समाज को दिशा देने में सक्षम है।
आचार्य शांतनु महाराज ने कहा कि जब तक समाज संगठित रहेगा, तब तक राष्ट्र सशक्त और सुरक्षित बना रहेगा। उन्होंने तुष्टिकरण की नीतियों को राष्ट्रहित के विरुद्ध बताते हुए कहा कि ऐसी प्रवृत्तियां दीर्घकाल में देश को कमजोर करती हैं। भारत की आत्मा गांवों में बसती है, इसलिए ग्रामीण सशक्तिकरण, स्वावलंबन और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण राष्ट्र निर्माण का मूल आधार होना चाहिए।

युवाओं का आह्वान करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और संस्कारों से जुड़ें तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति ही देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं और श्रोताओं ने आचार्य के विचारों का जोरदार स्वागत किया। शौर्य कथा के माध्यम से राष्ट्रभक्ति, धर्म और संस्कृति के प्रति जागरूकता का यह प्रयास समाज में सकारात्मक ऊर्जा और एकता का संदेश देने में सफल रहा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय सिंह गौतम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन रणविजय सिंह ने व्यक्त किया। इस अवसर पर डॉ. रमेश प्रताप सिंह, अजीत सिंह ‘बब्बू’, महेश्वर सिंह, संजीव सिंह, प्रसिद्ध नारायण सिंह, अरुण सिंह, किरण सिंह, नागेश सिंह, ठाकुर कुश प्रताप सिंह, राजेश सिंह, डॉ. अतुल सिंह, अंबिका सिंह सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









