वाराणसी ,12 अप्रैल 2026। शंकराचार्य घाट स्थित श्रीविद्या मठ में रविवार को आयोजित उच्चस्तरीय आपात बैठक में ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को मिली जान से मारने की धमकी के मामले में पुलिस की कथित शिथिल कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त किया गया। बैठक में वाराणसी प्रशासन, विशेषकर भेलूपुर थाना पुलिस की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठाए गए।
बैठक में उपस्थित विद्वानों एवं विधि विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल माध्यम से धमकी मिलने के बावजूद पुलिस द्वारा आईटी एक्ट की धाराओं को शामिल न करना न केवल संवेदनहीनता दर्शाता है, बल्कि यह कानूनी तथ्यों को दबाने का प्रयास भी प्रतीत होता है। अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि ऐसे गंभीर मामलों में तत्परता और कठोर कानूनी कार्रवाई अपेक्षित थी।
विज्ञप्ति के माध्यम से प्रशासन से कई सवाल भी पूछे गए। इसमें संज्ञेय अपराध की सूचना के बावजूद 48 घंटे तक एफआईआर दर्ज न किए जाने पर सवाल उठाया गया। साथ ही आरोप लगाया गया कि कमजोर धाराएं लगाकर आरोपियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठक में यह भी कहा गया कि आरोपी का अब तक गिरफ्त से बाहर रहना पुलिस की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिह्न है।

वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीकांत त्रिपाठी की अध्यक्षता में बैठक में शासन-प्रशासन से मांग की गई कि मामले में तत्काल कठोर धाराएं जोड़ी जाएं, आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शंकराचार्य करोड़ों सनातनियों की आस्था के केंद्र हैं और उनके प्रति किसी भी प्रकार की उपेक्षा पूरे समाज का अपमान है। चेतावनी दी गई कि यदि शीघ्र न्यायसंगत कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक स्तर पर लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान साध्वी पूर्णाम्बा, साध्वी शारदाम्बा, ब्रह्मचारी परमात्मानंद, पूर्व अध्यक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन प्रभु नारायण, बनारस बार एसोसिएशन अध्यक्ष विनोद शुक्ल, पूर्व महामंत्री कमलेश यादव सहित अनेक अधिवक्ता व गणमान्य लोग उपस्थित रहे।इसी क्रम में शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पाण्डेय ने केंद्र सरकार से शंकराचार्य को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जब अन्य व्यक्तियों को उच्चस्तरीय सुरक्षा दी जा सकती है, तो देश के करोड़ों सनातनियों की आस्था के केंद्र को यह सुरक्षा क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने संभावित अनहोनी की स्थिति में जिम्मेदारी तय करने का भी प्रश्न उठाया।









