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विश्व की बदलती व्यवस्था में भारत की भूमिका पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न

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वाराणसी। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के सामाजिक विज्ञान विभाग एवं इंडियन एसोसिएशन ऑफ जर्नलिस्ट (आईएजे) के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को विश्वविद्यालय स्थित योग साधना केंद्र में “विश्व की बदलती व्यवस्था – भारत की भूमिका” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण के साथ हुआ। मुख्य अतिथि प्रो. प्रेम नारायण सिंह (निदेशक, अंतर विश्वविद्यालय अध्यापक शिक्षा केंद्र) ने कहा कि देश में तकनीकी और भौतिक विकास तेजी से हुआ है, लेकिन इसके साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा है, जो भविष्य में गंभीर चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि युद्ध पहले मन में जन्म लेता है, उसके बाद धरातल पर दिखाई देता है।

उन्होंने गांधी और बुद्ध के अहिंसा सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत शास्त्र और शस्त्र दोनों का देश रहा है। राष्ट्र के समग्र विकास के लिए जहां अहिंसा आवश्यक है, वहीं सामरिक शक्ति को भी मजबूत रखना जरूरी है। उन्होंने सशक्त व्यक्तित्व निर्माण को विकसित भारत की आधारशिला बताया।

विशिष्ट अतिथियों में डॉ. शरद कुमार श्रीवास्तव, अशोक कुमार पाण्डेय (कार्यक्रम प्रमुख, आकाशवाणी), राजेश गौतम (पूर्व निदेशक, आकाशवाणी), प्रो. जितेंद्र कुमार, रामनरेश नरेश, राधा सिंह एवं अमन सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रमेश प्रसाद (संकाय अध्यक्ष, श्रमण विद्या संकाय) ने की। संचालन प्रो. राजनाथ ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. कैलाश सिंह ‘विकास’ (राष्ट्रीय अध्यक्ष, आईएजे) ने किया।

इस अवसर पर डॉ. जिनेश कुमार, चंद्रभान, डॉ. अमित कुमार दुबे, मोतीलाल गुप्ता, मोहम्मद दाऊद, आशीर्वाद सिंह, इंजीनियर रामनरेश, डॉ. विनय कुमार श्रीवास्तव, विक्रम कुमार, राजू वर्मा, विक्की वर्मा, अमित कुमार पाण्डेय, प्रकाश आचार्य, संजय कुमार पाण्डेय, तेजस कुमार सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।

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