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लोक ऋषि हरि भैया की जयंती पर सजी लोकगीतांजलि, परंपरा की स्वरधारा में डूबा काशी का सांस्कृतिक आंगन

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वाराणसी। लोक परंपरा के संवाहक लोक ऋषि हरि भैया की जयंती पर जगतगंज स्थित कोठी में ‘लोकगीतांजलि’ कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। अशोक मिशन शैक्षिक समिति एवं बाबू जगत सिंह शोध समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में काशी की समृद्ध लोक-सांस्कृतिक विरासत जीवंत हो उठी।

कार्यक्रम के दौरान भोजपुरी शोध न्यास द्वारा प्रकाशित पुस्तक ‘अंगनइया में दियना जराय रखिहा’ का अतिथियों ने लोकार्पण किया। आयोजन का उद्देश्य हरि भैया के लोक-सांस्कृतिक अवदान को स्मरण करते हुए उन्हें भावभीनी स्वरांजलि अर्पित करना रहा।

बाबू जगत सिंह शोध समिति के प्रदीप नारायण सिंह ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ देकर स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ लोकगीतों की सुमधुर प्रस्तुतियों से हुआ, जिसने श्रोताओं को लोक-रस में सराबोर कर भावविभोर कर दिया।

लोकगीतांजलि में आठ कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। अक्षय शर्मा ने ओजपूर्ण गीत से कार्यक्रम की शुरुआत की, जबकि आलोक द्विवेदी की चैती ने पारंपरिक लोकधारा को सजीव कर दिया। शैलबाला, दुर्गेश उपाध्याय, सरोज वर्मा, सुचारिता गुप्ता और संतोष श्रीवास्तव ने भी अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। कार्यक्रम का समापन नागेंद्र शर्मा के गीत के साथ हुआ, जिसने वातावरण को भावपूर्ण बना दिया।

कार्यक्रम का संचालन अशोक आनंद ने किया। डॉ. (मेजर) अरविंद कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि साहित्यकार डॉ. रामसुधार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं संस्कृतिकर्मी उपस्थित रहे।

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