वाराणसी। भेलूपुरा स्थित जिम स्पोर्टिंग क्लब में रविवार को सामाजिक संस्था “बन्धु” के तत्वावधान में स्वैच्छिक रक्तदान एवं निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर का सफल आयोजन किया गया। समाजसेवी कमल दा की स्मृति में आयोजित इस शिविर में स्थानीय नागरिकों, युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की उल्लेखनीय भागीदारी रही।

स्वामी हरशंकरानंद जी हॉस्पिटल, सुंदरपुर के सहयोग से आयोजित इस शिविर का उद्देश्य रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाना और जरूरतमंद मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता सुनिश्चित करना रहा।
शिविर में खासतौर पर युवाओं का उत्साह देखने को मिला, जहां कई लोगों ने पहली बार रक्तदान कर समाज सेवा की दिशा में कदम बढ़ाया। सभी रक्तदाताओं का पूर्व परीक्षण कर सुरक्षित रक्तदान सुनिश्चित किया गया। डॉ. जय सिंह के नेतृत्व में चिकित्सा टीम ने पूरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न कराया। रक्तदाताओं को प्रमाण पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया।


इसके साथ ही आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। ACE Laboratories की डॉ. अंशिका भारद्वाज एवं अन्य चिकित्सकों द्वारा ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर सहित सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण किए गए। वहीं, डॉ. ए.के. रॉय के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने मरीजों को आवश्यक चिकित्सा परामर्श प्रदान किया। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए यह पहल विशेष रूप से लाभकारी रही।
महिलाओं के लिए आयोजित निःशुल्क स्तन कैंसर स्क्रीनिंग इस शिविर की प्रमुख विशेषता रही। डॉ. विनीता श्रीवास्तव एवं उनकी टीम ने महिलाओं को प्रारंभिक लक्षणों और स्वयं परीक्षण (Self Breast Examination) की विधि के प्रति जागरूक किया, जिससे समय रहते बीमारी की पहचान संभव हो सके। शिविर में डॉ. अरुणिमा बटब्याल द्वारा होम्योपैथिक चिकित्सा परामर्श भी दिया गया, जिससे लोगों को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति की जानकारी मिली।
कार्यक्रम में भरत यादव, नितेश, अंजलि, अनुष्का, अनु श्री, रमेश यादव, अभिषेक यादव, रानी आरती, जय सिंह (ब्लड बैंक इंचार्ज), अमित श्रीवास्तव, राजेश शर्मा, प्रिंस श्रीवास्तव, डॉ. अभिषेक रघुवंशी, बावला तथा राजन श्रीवास्तव, प्रवीर कुमार पाल और सुजॉय भट्टाचार्य सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। “बन्धु” संस्था का यह प्रयास समाज में सेवा, सहयोग और स्वास्थ्य जागरूकता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। ऐसे आयोजन निश्चित रूप से जनहित में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में सार्थक पहल साबित होते हैं।









