प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने आगामी बोर्ड परीक्षाओं को नकलविहीन, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। परिषद ने सामूहिक नकल, पेपर लीक की संभावनाओं तथा पूर्व वर्षों की कानून-व्यवस्था संबंधी घटनाओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के 18 जनपदों को संवेदनशील घोषित किया है। संवेदनशील घोषित किए गए जिलों में आगरा, मथुरा, अलीगढ़, हाथरस, एटा, कासगंज, प्रयागराज, कौशांबी, प्रतापगढ़, हरदोई, कन्नौज, आजमगढ़, बलिया, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर, देवरिया एवं गोण्डा शामिल हैं। इन जनपदों में परीक्षा संचालन को लेकर विशेष निगरानी और अतिरिक्त सतर्कता बरतने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। यूपी बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इन संवेदनशील जिलों में परीक्षा केंद्रों की कड़ी मॉनिटरिंग, प्रश्नपत्रों की सुरक्षित आपूर्ति, सीसीटीवी कैमरों की प्रभावी निगरानी तथा केंद्र व्यवस्थापकों की जवाबदेही तय की जाएगी। साथ ही, किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनुचित गतिविधि पाए जाने पर तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं। बोर्ड ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे परीक्षा से पूर्व संबंधित अधिकारियों, केंद्र व्यवस्थापकों, पुलिस एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ अनिवार्य समीक्षा बैठक आयोजित करें। बैठक में नकल रोकने के लिए अपनाई जाने वाली रणनीति, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा करने को कहा गया है। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने विज्ञप्ति जारी कर जानकारी देते हुए कहा कि बोर्ड परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखना परिषद की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवेदनशील जनपदों में प्रशासनिक सतर्कता के साथ-साथ तकनीकी संसाधनों का भी अधिकतम उपयोग किया जाएगा, ताकि परीक्षाएं पूरी निष्पक्षता और शांति के साथ सम्पन्न हो सकें। बोर्ड के इस फैसले को शिक्षा जगत में सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है। अभिभावकों और शिक्षाविदों का मानना है कि सख्त निगरानी और प्रशासनिक सक्रियता से परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता बढ़ेगी और मेहनती विद्यार्थियों को उनका वास्तविक हक मिल सकेगा।









