भारत की सांस्कृतिक विरासत को एक और बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है। विश्वप्रसिद्ध पर्व दीपावली (Deepavali) को संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) ने अपनी “Intangible Cultural Heritage of Humanity”—अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिष्ठित सूची—में शामिल कर लिया है। यह निर्णय यूनेस्को की अंतर-सरकारी समिति की बैठक के दौरान हुआ, जिसका आयोजन इस वर्ष भारत में किया जा रहा है।
यूनेस्को ने दीपावली को एक धार्मिक आयोजन भर नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जीवंतता, सामुदायिक एकता, आध्यात्मिकता और लोक परंपराओं के वैश्विक प्रतीक के रूप में मान्यता दी है। दीये जलाना, लोककलाएं, पारंपरिक उत्सव, संगीत-नृत्य, पारिवारिक अनुष्ठान, सामूहिक उल्लास और पीढ़ियों से स्थानांतरित सांस्कृतिक ज्ञान को इस पर्व की विशिष्टता माना गया है।
सरकार और सांस्कृतिक विशेषज्ञों ने इसे भारत की सांस्कृतिक शक्ति और विविधता की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति बताया है। इसके साथ ही यह उम्मीद जताई जा रही है कि दीपावली से जुड़े हस्तशिल्प, कलाओं, पारंपरिक शिल्पियों और सांस्कृतिक उद्योगों को वैश्विक संरक्षण और अवसर और अधिक मिलेंगे।

दीपावली के जुड़ने के बाद भारत की कुल 16 सांस्कृतिक परंपराएं इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल हो चुकी हैं। ये हैं—
1. योग
2. नवकल्लिका नृत्य
3. रामलीला
4. दुर्गा पूजा
5. कुंभ मेला
6. कलारीपयट्टु
7. छऊ नृत्य
8. बौद्ध मंत्रोच्चार (Buddhist chanting)
9. वैदिक मंत्रोच्चार
10. मुडियेट्टू (केरल का अनुष्ठान)
11. कुदियाट्टम (संस्कृत रंगमंच परंपरा)
12. रमैनी (रामायण पर आधारित लोककथा परंपरा)
13. तेरह ताल की परंपरा
14. थंजावुर वील (Thanjavur Veenai)
15. गरबा
16. अब दीपावली (Deepavali)
ये परंपराएँ भारत की सांस्कृतिक विविधता, कला, अध्यात्म, सामाजिक जीवन और हजारों वर्षों पुराने ज्ञान-संस्कारों की अद्भुत संपदा को दर्शाती हैं। यूनेस्को का यह निर्णय भारत को न केवल सांस्कृतिक स्तर पर सशक्त करता है, बल्कि वैश्विक पटल पर इसकी परंपराओं की विशिष्टता को स्थायी पहचान भी देता है।









